नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। ओडिशा (Odisha)में स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार 14 जुलाई को 46 साल बाद खोला गया। इससे पहले यह खजाना 1985 में खोला गया था। इस दौरान आशंका जताई जा रही थी कि भंडार में सांप हो सकते हैं। जिसके बाद स्नैक हेल्पलाइन के साथ मेडिकल टीम को भी मौके पर बुलाया गया। बता दें कि भगवान जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार को खोले जाने की काफी लंबे समय से मांग की जा रही थी। जिसके बाद मंदिर के खजाने को खोला गया।
5 दिनों के अंदर दोबारा खोला गया रत्न भंडार
मरम्मत को लेकर रत्न भंडार को खोला गया। गौरतलब है कि इस रत्न भंडार की चाबियां खो गई थी। इसलिए इसमें लगे ताले तोड़कर नए ताले डाले गए थे। इसके बाद 18 जुलाई को एक बार फिर रत्न भंडार को खोला गया। इस दौरान भंडार में 11 सदस्यों की टीम करीब 7 घंटे तक रही। इस दौरान सरकार के द्वार गठित समिति के अध्यक्ष जस्टिस विश्वनाथ रथ ने कहा कि पहले रत्न भंडार की मरम्मत का काम होगा। भगवान से प्रार्थना करो कि काम जल्द से जल्द पूरा हो जाए। उन्होंने आगे कहा कि ये भंडार पिछले 46 साल से नहीं खुला है। अब फाइनली बीते 14 जुलाई को खुल गया। 5 दिनों के अंदर रत्न भंडार को दोबारा खोला गया है। इसलिए हम प्रार्थना करते हैं कि भगवान हमें आशीर्वाद दें ताकि हम ये काम जल्द से जल्द पूरा कर सकें।
रत्न भंडार में कितना खजाना रखा है?
इस संबंध में श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के प्रमुख अरबिंद पाधी ने जानकारी देते हुए कहा कि रत्न भंडार के चैंबर से सभी कीमती सामान एक अस्थाई स्ट्रांग रूम में शिफ्ट कर दिए गए हैं। इनमें लकड़ी और स्टील की अलमारी, संदूक सहित 7 कंटेनर शामिल हैं। भीतरी कक्ष और अस्थाई स्ट्रांग रूम दोनों को बंद कर सील कर दिया गया है।
7 कंटेनरों में रखे गए हैं कीमती सामान
वहीं उड़ीसा हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति विश्वनाथ रथ ने कहा कि भीतरी कक्ष के अंदर आभूषण और कीमती सामान 7 कंटेनर में रखे गए हैं। इनमें 3 लकड़ी, दो लकड़ी की पेटी और एक स्टील की अलमारी और एक लोहे की पेटी है। सभी कीमती सामानों को नए कंटेनरों में रखा गया है और स्ट्रांग रूम को सील कर दिया गया है। चाबियां पुरी कलेक्टर को दे दी गई हैं।
1985 में क्या-क्या दिखा था खजाने में?
इससे पिछली बार साल 1985 में इस रत्न भंडार को खोला गया था। उस दौरान खजाने में राजाओं के मुकुट से लेकर खजानों से भरी तिजोरियां देखने को मिली थी। ये उस दौर के राजाओं और भक्तों ने मंदिर में चढ़ाए थे। इस रत्न भंडार में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के कीमती आभूषण और बर्तन भी रखे गए थे।
2 हिस्से में है भंडारघर
12वीं सदी में बने इस मंदिर के भंडारघर के दो हिस्से हैं। एक बाहरी हिस्सा है और एक भीतरी हिस्सा है। बाहरी हिस्से के खजाने को समय-समय पर खोला जाता है। त्योहार या रथ यात्रा के समय इस बाहरी हिस्से के खजाने को खोलकर भगवान का श्रृंगार किया जाता है। वहीं भंडारघर का भीतरी हिस्सा पिछले 46 साल से बंद था। साल 2018 में विधानसभा में पूर्व कानून मंत्री प्रताप जेना ने बताया था कि 1978 में जब खजाना खोला गया था तो उस समय 12 हजार भरी सोने के गहने थे। तो वहीं 22 हजार भरी से कुछ ज्यादा चांदी के बर्तन थे। उस समय इसका वजन नहीं किया गया था।
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