नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। कोलकाता में एक महिला ट्रेनी डॉक्टर की रेप के बाद निर्मम हत्या ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। हर भारतीय सोच रहा है कि जब देश में एक महिला डॉक्टर ही सुरक्षित नहीं है तो आम महिलाएं कैसे सुरक्षित होंगी। देश में महिलाओं के साथ इस तरह के अपराध कोई नए नहीं हैं, इससे पहले भी महिलाओं के साथ बड़े अपराध होते रहे हैं, लेकिन फिर भी सरकार, प्रशासन और पुलिस इस तरह के अपराधों पर लगाम नहीं लगा पाती है। वर्ष 2012 में निर्भया रेप और मर्डर ने भी पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। जिसने देश की राजधानी दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए थे। वहीं हम आपको आज इस खबर के माध्यम से महिलाओं के साथ रेप के एक ऐसे जघन्य अपराध की चर्चा करेंगे, जिसको सुनने के बाद आपका खून खोल जाएगा। लेकिन इस अपराध के बारें में जानना भी बहुत ही जरुरी है। ताकि महिलाओं के खिलाफ इस तरह के अपराधों पर लगाम लगाया जा सके।
जिसने भी इस कांड के बारे में सुना था, उसका खून खौल उठा था
इसके लिए हम सबको जागरूक होना होगा और समाज में इस तरह की बुराई के खिलाफ मिलकर आवाज उठानी होगी। आज हम महिलाओं के खिलाफ रेप के जिस जघन्य अपराध की चर्चा करने जा रहे हैं, वो राजस्थान के अजमेर से जुड़ी है। इसको अजमेर रेप और ब्लैकमेल कांड कह सकते हैं। अजमेर के इस रेप और ब्लैकमेल कांड ने अजमेर के गौरवशाली इतिहास पर ही एक बड़ा दाग लगा दिया था।
इस स्कैंडल का खुलासा होने पर पूरा देश हिल गया था
बता दें कि जब अजमेर में महिलाओं के साथ रेप और ब्लैकमेल कांड का खुलासा हुआ तो उसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। जिसने भी इस कांड के बारे में सुना था, उसका खून खौल उठा था। इस रेप और ब्लैकमेल कांड के कारण लोग अपने बेटों की शादी अजमेर की लड़कियों के साथ करने से बचने लगे थे। क्योंकि वे यह सोचते थे कि वो लड़की भी अजमेर रेप और ब्लैकमेल कांड की पीड़िता हो सकती है।
उन्होंने स्कूल की 17-20 साल की 100 लड़कियों को अपना शिकार बना डाला था
राजस्थान के अजमेर रेप और ब्लैकमेल कांड को लेकर कोर्ट ने बाकि बचे 6 अपराधियों को 20 अगस्त 2024 को 32 साल बाद उम्रकैद की सजा सुना दी है। दरअसल अजमेर रेप और ब्लैकमेल कांड का खुलासा मई 1992 में राजस्थान के एक स्थानीय अखबार “दैनिक नवज्योति अखबार” द्वारा किया जाता है। इस अखबार ने अपने फ्रंट पेज में इस खबर को छापा था, जिसकी हैडलाइन में लिखा हुआ था “बड़े लोगों की बेटियां ब्लैकमेल का शिकार”।
राजस्थान के अजमेर रेप और ब्लैकमेल कांड को लेकर कोर्ट ने बाकि बचे 6 अपराधियों को 20 अगस्त 2024 को 32 साल बाद उम्रकैद की सजा सुना दी है। दरअसल अजमेर रेप और ब्लैकमेल कांड का खुलासा मई 1992 में राजस्थान के एक स्थानीय अखबार “दैनिक नवज्योति अखबार” द्वारा किया जाता है। इस अखबार ने अपने फ्रंट पेज में इस खबर को छापा था, जिसकी हैडलाइन में लिखा हुआ था “बड़े लोगों की बेटियां ब्लैकमेल का शिकार”।
एक गिरोह ने बनाया था इन लड़कियों को अपना शिकार
जैसे ही लोगों ने इस खबर को पढ़ा तो सबके सामने इस रेप और ब्लैकमेल कांड की डरावनी कहानी सबके सामने आ जाती है। जिसके बाद खुलासा होता है कि एक गिरोह ने अजमेर के एक प्रतिष्ठित गर्ल्स स्कूल की लड़कियों को अपना निशाना बनाया था, वे इस स्कूल की लड़कियों को अपने फार्म हाउस में बुलाकर रेप करते थे और उन लड़कियों की अश्लील फोटो लेकर उन्हें अपनी ही स्कूल की अन्य लड़कियों को फार्म हाउस में लाने के लिए दवाब बनाते थे। ऐसा करके उन्होंने स्कूल की 17-20 साल की 100 लड़कियों को अपना शिकार बना डाला था।
गिरोह इन लड़कियों को ब्लैकमेल करके अपने फार्म हाउस में बुलाता था
अजमेर का यह गिरोह इन लड़कियों को ब्लैकमेल करके अपने फार्म हाउस में बुलाता था और सभी मिलकर उनका रेप किया करते थे। बता दें कि अजमेर रेप और ब्लैकमेल कांड का मुख्य आरोपी तत्कालीन अजमेर यूथ कांग्रेस का अध्यक्ष फारूक चिश्ती, अनवर चिश्ती, नफीस चिश्ती समेत कई अन्य लोग शामिल थे।
सबसे पहले जानते हैं कि अजमेर के प्रतिष्ठित गर्ल्स स्कूल की लड़कियां इन अपराधियों के जाल में कैसे फंसी। गिरोह में शामिल मुख्य अपराधी फारूक चिश्ती ने ही सबसे पहले अजमेर के एक प्रतिष्ठित गर्ल्स स्कूल की एक नाबालिग लड़की को अपने प्यार के जाल में फंसा लिया था और वह नाबालिग लड़की को किसी बहाने से अपने फार्म हाउस ले जाने में कामयाब रहा था, जहां उसने और उसके अन्य साथियों ने नाबालिग लड़की के साथ रेप किया। सभी आरोपियों ने नाबालिग लड़की की अश्लील तश्वीर भी ली और उसको यह अश्लील तश्वीर दिखाकर आरोपियों ने नाबालिग लड़की पर अपनी सहेलियों को भी फार्म हाउस लाने का दवाब बनाया। धीरे धीरे ऐसे करके उन्होंने अजमेर के एक प्रतिष्ठित स्कूल की 100 लड़कियों को रेप और ब्लैकमेल का शिकार बना लिया था।
पूरे राजस्थान में अपरधियों के खिलाफ लोगों का प्रदर्शन शुरू हो गया था
धीरे धीरे इस रेप और ब्लैक मेल कांड का खुलासा होने लगा, क्योंकि इस रेप कांड से जुडी लड़कियों की अश्लील तश्वीरें वायरल होने लगी थी। इनमे से ही एक लड़की की अश्लील तश्वीर स्थानीय दैनिक नवज्योति अखबार में युवा पत्रकार संतोष गुप्ता तक भी पहुंची। जिसको देख कर उनका खून खौल गया था। पत्रकार संतोष गुप्ता ने इस गिरोह के अपराधियों के अपराध को उनकी फोटो के साथ अपने स्थानीय अखबार में छापना शुरू कर दिया था। जिसके बाद अजमेर समेत पूरे राजस्थान में अपरधियों के खिलाफ लोगों का प्रदर्शन शुरू हो गया था।
जिसके बाद सीआईडी सीबी ने इस रेप और ब्लैकमेल कांड की पुष्टि की
इस पूरे रेप और ब्लैकमेल कांड का पता राजस्थान पुलिस को भी था। लेकिन पुलिस ने भी इस मामले को दबाने की ही कोशिश की थी। लेकिन पत्रकार संतोष गुप्ता द्वारा शुरू की गई जंग के कारण उस समय की तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत की मौजूदा भाजपा सरकार ने इस मामले की जांच सीआईडी सीबी को 30 मई 1992 को सौप दी थी। जिसके बाद सीआईडी सीबी ने इस रेप और ब्लैकमेल कांड की पुष्टि की। इस रेप और ब्लैक मेल कांड के 18 दोषियों को सजा दिलाने में पत्रकार संतोष गुप्ता के साथ ही राजस्थान के वकील और हिन्दू संगठनो का बड़ा हाथ रहा है। वहीं 20 अगस्त 2024 को अजमेर की कोर्ट ने पूरे 32 साल बाद बाकि बचे 6 आरोपियों को उम्रकैद की सजा के साथ साथ पांच लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।





