back to top
17.1 C
New Delhi
Friday, March 20, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

Birthday Special: वो मुद्दा जिसने ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री बनाया, जानिए आंदोलन से सत्ता तक का सफर

आज पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपना 71वां जन्मदिन मना रही हैं। सादगी, संघर्ष और जिद की मिसाल बनी ममता बनर्जी का राजनीतिक सफर आसान नहीं रहा।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। आज पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपना 71वां जन्मदिन मना रही हैं। सादगी, संघर्ष और जिद की मिसाल बनी ममता बनर्जी का राजनीतिक सफर आसान नहीं रहा। जिस वामपंथी सरकार की पुलिस ने कभी उन्हें कोलकाता के धर्मतला चौराहे पर लाठियों से पीटा था, उसी सरकार को सत्ता से बाहर करने का संकल्प उन्होंने लिया और उसे पूरा भी किया।

परिवार चलाने के लिए बेचा दूध

ममता बनर्जी का जन्म 5 जनवरी 1955 को कोलकाता के एक गरीब परिवार में हुआ। महज 17 साल की उम्र में उनके पिता का निधन हो गया। परिवार की आर्थिक हालत बेहद कमजोर थी। जिम्मेदारियां ममता के कंधों पर आ गईं। कहा जाता है कि उन्होंने परिवार चलाने के लिए दूध तक बेचा, लेकिन हालात से हार नहीं मानी। पढ़ाई में भी ममता आगे रहीं। उन्होंने योगमाया देवी कॉलेज से ग्रेजुएशन, कलकत्ता विश्वविद्यालय से इस्लामिक इतिहास में पोस्ट ग्रेजुएशन और बाद में कानून की डिग्री हासिल की। कम उम्र में ही उनका झुकाव राजनीति की ओर हो गया और वे कांग्रेस पार्टी से जुड़ गईं।

लोकसभा चुनाव जीतकर संसद में रखा कदम

साल 1984 में ममता बनर्जी ने कलकत्ता दक्षिण सीट से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद में कदम रखा। उस समय वे देश की सबसे कम उम्र की सांसदों में शामिल थीं। 1991 और 1996 में भी वे सांसद बनीं और केंद्र सरकार में मंत्री पद तक पहुंचीं। हालांकि, 1997 में कांग्रेस से अलग होकर उन्होंने अपनी पार्टी अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) बनाई। राजनीतिक संघर्ष के दौरान ममता पर कई बार हमले हुए। 1990 में जानलेवा हमला हुआ, जिसके बाद उन्हें एक महीने तक अस्पताल में रहना पड़ा। 1993 में फोटोयुक्त वोटर आईडी की मांग को लेकर हुए आंदोलन में पुलिस फायरिंग हुई, जिसमें 14 लोगों की मौत हो गई। ममता खुद भी घायल हुईं, लेकिन उन्होंने आंदोलन की राह नहीं छोड़ी। ममता बनर्जी के राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा मोड़ आया सिंगूर आंदोलन से। साल 2005 में वाम सरकार ने टाटा नैनो फैक्ट्री के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहित की। ममता ने इसे किसानों के साथ अन्याय बताते हुए बड़ा आंदोलन छेड़ दिया। आंदोलन इतना असरदार रहा कि टाटा को बंगाल से फैक्ट्री हटानी पड़ी। यही मुद्दा ममता को जनता के बीच नई पहचान दिलाने वाला साबित हुआ। इसका नतीजा 2011 के विधानसभा चुनाव में सामने आया, जब ममता बनर्जी ने 34 साल पुराने वाम शासन को खत्म कर पश्चिम बंगाल की सत्ता अपने नाम की। इसके बाद 2016 और 2021 में भी तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव जीतकर सरकार बनाई।

Advertisementspot_img

Also Read:

Birthday Special: पत्नी की आखिरी इच्छा पूरी नहीं कर पाए तो रो पड़े थे नीतीश कुमार, जन्मदिन पर जानिए उनकी जिंदगी के अनसुने किस्से

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज अपना 75वां जन्मदिन मना रहे हैं। सूबे की राजनीति में कई बड़े चेहरे रहे हैं,...
spot_img

Latest Stories

दिव्यांका नाम का मतलब- Divyanka Name Meaning

Divyanka of Haksh / दिव्यांका नाम का मतलब :...

कौन हैं भगवान शिव? जानिए नाम, स्वरूप और शक्तियों से जुड़ी सारी जानकारी

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। भगवान शिव, जिन्हें महादेव, भोलेनाथ...

Special Recipe: नवरात्रि के नौ दिनों तक बनाए खास पकवान, व्रत में खा सकती हैं आसानी से

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) शुरू...

West Bengal Assembly Election 2026: कैसा रहा है Bahrampur Assembly Seat पर सियासी संग्राम, जानिए किसका रहा दबदबा

नई दिल्ली/ रफ्तार डेस्क। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026...

Divyanka Tripathi ने कई महीने तक छुपाई प्रेग्नेंसी, अब बेबी बंप फ्लॉन्ट करते हुए शेयर की तस्वीरें

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। टीवी की पॉपुलर एक्ट्रेस दिव्यांका...

जारी होने वाला है GATE 2026 का रिजल्ट, दाखिला लेने के लिए जान लें देश के Top 20 Engineering Colleges

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। देश के लाखों इंजीनियरिंग के छात्रों...