नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । महाराष्ट्र के कर्जत-जामखेड से एनसीपी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार एक बार फिर अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में एक सरकारी अधिकारी को सार्वजनिक रूप से फटकारने को लेकर उठे विवाद पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि वे अपने बयान पर कायम हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब कोई अधिकारी जनता की समस्याओं को अनदेखा करता है, तो नाराजगी स्वाभाविक है। दरअसल, उन्होंने पिछले दिनों एक सरकारी अधिकारी को कहा था कि “ये तुम्हारे बाप का पैसा नहीं है, जनता का पैसा है।”
रोहित पवार ने कहा कि “हम यंग लोग हैं, कभी-कभी हमारी सटक जाती है।” उन्होंने यह भी कहा कि यह गुस्सा किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि जनता के हक के लिए होता है। जो गलत है, वो गलत है, और जो सही है, उसे सही कहना जरूरी है। बयान पर मचे बवाल के बीच रोहित पवार ने न सिर्फ अपने शब्दों का बचाव किया, बल्कि अपने चाचा और राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अजित दादा की मंशा कभी गलत नहीं रही, लेकिन उनका अंदाज शायद कुछ लोगों को ठीक न लगा हो।
बता दें कि उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने भी एक महिला आईपीएस अधिकारी को व्यंग्यात्मक लहजे में फटकार लगाई थी, जिसके बाद राजनीति बवाल मच गया था। विधायक रोहित पवार ने यह भी कहा कि आज के समय में जनता को जवाबदेही चाहिए और प्रशासन से उम्मीद की जाती है कि वह संवेदनशीलता के साथ उनकी बात सुने। कुछ अधिकारी ईमानदारी से काम करते हैं, लेकिन कई बार लापरवाही या घमंड से जनता को नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य है कि वे सख्ती से जवाब मांगें।
“गलत को सुधारने के लिए कभी-कभी सख्त होना जरूरी है” – रोहित पवार
रोहित पवार ने बताया कि जब जामखेड में जनसुनवाई कर रहे थे और उस समय जल निकासी नहर के निर्माण कार्य में अधिकारियों की लापरवाही सामने आयी। एक स्थानीय नागरिक ने इस निर्माण में गड़बड़ी की तस्वीरें दिखाईं, जिस पर संबंधित अधिकारी ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि उन्हें नहीं पता ये तस्वीरें कब की हैं। पवार ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस काम में भाजपा नेता और राजस्व अधिकारी की मिलीभगत है, जिससे परियोजना की गुणवत्ता प्रभावित हुई। तब उन्होंने साफ कहा कि मैं अच्छे को अच्छा और गलत को गलत कहता हूँ, यही मेरा काम करने का तरीका है और मैं राजनीति में इसी मकसद से आया हूँ।
विधायक रोहित पवार ने आगे कहा कि वह दो बार के विधायक हैं और अगर शालीन भाषा में कहने के बावजूद अधिकारी काम नहीं करते, तो नाराजगी होना स्वाभाविक है। उन्होंने अधिकारियों के बारे में संतुलित टिप्पणी करते हुए कहा कि 90 फीसदी अधिकारी ईमानदारी से काम करते हैं, लेकिन 10 फीसदी ऐसे हैं जो जनता की समस्याएं नज़रअंदाज़ करते हैं। रोहित पवार ने यह भी कहा कि अधिकारी और विधायक जनता की सेवा के लिए होते हैं। जब कोई गरीब या महिला ऑफिस के चक्कर लगाकर भी अपनी समस्या का समाधान नहीं पाता, तो गुस्सा आना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि गलत को सही करने के लिए कभी-कभी टेढ़ा होना पड़ता है।
“हम यंग हैं, कभी-कभी सटक जाते हैं”
विधायक रोहित पवार ने कहा कि उनका उद्देश्य सिर्फ एक ही है कि जब किसी गरीब के काम के लिए वे अधिकारी को फोन करें तो वह काम कर दे। लेकिन जब अधिकारी काम नहीं करते तो गुस्सा आना स्वाभाविक है। रोहित पवार ने कहा कि हम यंग लोग हैं, हमारी कभी-कभी सटक जाती है। यह सटका जाना निजी स्वार्थ के लिए नहीं बल्कि गरीबों के कामों के समर्थन के कारण होता है। उन्होंने साफ किया कि वे किसी की व्यक्तिगत आलोचना करने या किसी का अपमान करने नहीं गए हैं। रोहित पवार ने कहा कि मैं किसी कैंटीन में जाकर किसी का मुंह नहीं तोड़ रहा, मैं लोगों के काम के लिए भड़का था। रोहित ने अपनी तुलना सत्ताधारी पार्टी के नेताओं से करते हुए कहा कि वे उनकी तरह नहीं हैं और उनका गुस्सा जनता की समस्याओं को लेकर निकलता है।
“मेरी स्टाइल है, मैं किसी की कॉपी नहीं करता”
अजित पवार से तुलना किए जाने पर विधायक रोहित पवार ने स्पष्ट किया कि उनका काम करने का तरीका अलग है और उनकी अपनी एक खास स्टाइल है। उन्होंने कहा कि मैं किसी की कॉपी नहीं करता। मैं अपनी पहचान बना रहा हूं और उसी पर काम कर रहा हूं। अजित पवार के बयान को लेकर उठे सवालों पर रोहित ने कहा कि उनके दादा की हिंदी इतनी अच्छी नहीं है, जिससे उनके कुछ बयान गलत तरीके से समझे गए। उन्होंने यह भी बताया कि भाषा की वजह से गलतफहमियां हो जाती हैं, लेकिन उनका उद्देश्य साफ और स्पष्ट है।
वंशवाद के सवाल पर बोले रोहित पवार
राजनीतिक वंशवाद के मुद्दे पर विधायक रोहित पवार ने कहा कि राजनेताओं का परिवार से आना कोई समस्या नहीं है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर और वकील जैसे पेशों में भाई-भतीजावाद पर कोई सवाल नहीं उठता, तो हमें क्यों कहा जाता है?” रोहित पवार ने कहा कि भाई-भतीजावाद एक तरह का विशेषाधिकार होता है, लेकिन इसके साथ एक बड़ा बोझ भी आता है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपना राजनीतिक सफर जिला परिषद से शुरू किया था और अनुभव व मेहनत के बल पर पार्टी के सत्ता में आने पर बड़ी जिम्मेदारियां निभाने का लक्ष्य रखा है।
आरक्षण के साथ नीति सुधार भी जरूरी
जाति-आधारित आरक्षण पर विधायक रोहित पवार ने कहा कि आरक्षण महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ-साथ नीतियों पर भी काम करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में शुरुआत से ही समानता सुनिश्चित करनी होगी, जैसे यूनिफॉर्म के मामले में। साथ ही सरकार का सहयोग भी जरूरी है। रोहित पवार ने मौजूदा कृषि संकट को स्वीकार करते हुए युवाओं को सचेत किया कि केवल आरक्षण से रोजगार की गारंटी नहीं मिल सकती। उन्होंने सवाल उठाया कि नौकरियां कहां से आएंगी?” इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि हर समुदाय की उपजातियों को आरक्षण का बराबर लाभ नहीं मिलता। मराठा आरक्षण के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने सीधे हां या ना का जवाब देने से बचते हुए व्यापक नीतिगत समर्थन की आवश्यकता पर जोर दिया।
पवार परिवार में फूट पर बोले रोहित पवार
पवार परिवार में चल रहे विवादों पर विधायक रोहित पवार ने कहा कि ऐसा होना चाहिए नहीं था, लेकिन मुझे अपने दादा शरद पवार के साथ बने रहने पर कोई अफसोस नहीं है। अजित पवार से जुड़ी घटनाओं, जिनमें ड्यूटी पर तैनात महिला डीएसपी को डांटने का मामला भी शामिल है। उनके बारे में रोहित पवार ने कहा कि जरूरत पड़ने पर अधिकारियों पर आवाज उठाना उनका अधिकार है और इस पर उन्हें कोई पछतावा नहीं।
इसके अलावा महाराष्ट्र के राजनीतिक हालात और भाजपा में शामिल होने की अफवाहों पर रोहित पवार ने स्पष्ट इनकार किया। उन्होंने कहा कि अगर अजित पवार भाजपा छोड़ दें, तभी हम साथ आ सकते हैं। भाजपा के साथ जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता। रोहित पवार ने कहा कि उनका पूरा ध्यान महाराष्ट्र के विकास और काम पर केंद्रित है,और केंद्र सरकार में किसी भूमिका की उनकी कोई इच्छा नहीं है।
“




