नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) की बैठक में वक्फ संशोधन बिल को नए स्वरूप में पेश करने का फैसला किया गया है। जेपीसी ने सत्ता पक्ष की ओर से पेश किए गए 14 संशोधन प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है, जबकि विपक्ष द्वारा प्रस्तावित 44 संशोधन खारिज कर दिए गए। छह महीने की लंबी चर्चाओं के बाद यह समिति की अंतिम बैठक थी। जेपीसी की बैठक में 31 में से 26 सदस्य उपस्थित रहे। इसमें 16 सदस्य सत्ता पक्ष के थे, जबकि 10 विपक्ष से जुड़े हुए थे। वोटिंग के दौरान सत्ता पक्ष के संशोधन 16-10 के अंतर से पास हो गए और विपक्ष के सभी प्रस्ताव खारिज कर दिए गए।
स्वीकृत संशोधन कौन-कौन से हैं?
1.वक्फ संपत्ति का निर्धारण : अब यह तय करने का अधिकार सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी को होगा, जो कलेक्टर या उससे ऊपर के पद का होगा। पहले बिल में जिला कलेक्टर को यह अधिकार दिया गया था।
2.क्फ ट्रिब्यूनल में बदलाव : ट्रिब्यूनल में अब दो की बजाय तीन सदस्य होंगे, जिसमें एक इस्लामिक स्कॉलर को शामिल किया जाएगा।
3.गैर-मुस्लिम सदस्यों की संख्या में वृद्धि : वक्फ बोर्ड/काउंसिल में अब कम से कम दो गैर-मुस्लिम सदस्य अनिवार्य रूप से रहेंगे, जो पहले अधिकतम दो तक सीमित थे।
4.संपत्ति दान के नियम: जो व्यक्ति अपनी संपत्ति वक्फ में देना चाहता है, उसे साबित करना होगा कि वह पिछले पांच वर्षों से इस्लाम का पालन कर रहा है और संपत्ति विवादमुक्त होनी चाहिए।
संशोधन पर संभावित विवाद
वक्फ बोर्ड/काउंसिल में गैर-मुस्लिम सदस्यों की संख्या बढ़ाने को लेकर विरोध की आशंका जताई जा रही है। कई विपक्षी नेता इस प्रावधान का विरोध कर रहे हैं और इसे अनावश्यक बता रहे हैं। जेपीसी की अगली बैठक 29 जनवरी को होगी, जिसमें संशोधित बिल की ड्राफ्ट रिपोर्ट समिति के सदस्यों को सौंपी जाएगी। रिपोर्ट में विपक्षी सदस्यों के विरोध को भी शामिल किया जाएगा। रिपोर्ट को 31 जनवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र में लोकसभा स्पीकर को सौंपे जाने की संभावना है। इसके बाद बिल को नए स्वरूप में संसद में पेश किया जाएगा, जहां उस पर विस्तृत चर्चा होगी और पास करने की प्रक्रिया शुरू होगी। वक्फ संशोधन बिल को लेकर सत्ता पक्ष के संशोधनों को मंजूरी मिल चुकी है, जबकि विपक्ष को झटका लगा है। अब सभी की निगाहें आगामी संसद सत्र पर टिकी हैं, जहां बिल को लेकर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।




