नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 26/11 मुंबई आतंकी हमले के आरोपी तहव्वुर राणा की आपातकालीन याचिका को खारिज कर दिया है। उसने भारत में प्रत्यर्पण के स्थगन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उसने कोर्ट में तर्क दिया कि वो पाकिस्तानी मूल का मुस्लिम है, यदि उसका भारत में प्रत्यर्पण किया गया तो उसे बहुत प्रताड़ित किया जाएगा। इस फैसले के साथ ही अब राणा के भारत प्रत्यर्पण का रास्ता भी साफ हो गया है।
विशेषकर मुसलमानों के भेदभाव का आरोप लगाया गया है
गौरतलब है कि राणा ने भारत में अपने प्रत्यर्पण पर आपातकालीन रोक लगाने के लिए शीर्ष अमेरिकी अदालत का दरवाजा खटखटाया था। इस अर्जी में उसने दावा किया था कि उसकी धार्मिक पहचान और सामाजिक पृष्ठभूमि के कारण उसे भारत में प्रताड़ित किया जाएगा और मार दिया जाएगा। न्यायमूर्ति एलेना कैगेन ने उसके आवेदन को अस्वीकार कर दिया है जिसके बाद उसके वकील ने सीधे मुख्य न्यायाधीश के पास अपील की है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि भारत में सरकार तेजी से निरंकुश होती जा रही है और उन्होंने ह्यूमन राइट्स वॉच 2023 वर्ल्ड रिपोर्ट का हवाला दिया है। जिसमें भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार पर धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेषकर मुसलमानों के भेदभाव का आरोप लगाया गया है।
कई बार कोविड-19 संक्रमण की चपेट में भी आ चुका है।
वहीं दूसरी ओर अर्जी में जुलाई 2024 के चिकित्सा रिकॉर्ड का हवाला भी दिया गया था। जिसमें ये संकेत दिए गए थे राणा कई गंभीर और जानलेवा बीमारियों से जूझ रहा है। इन बीमारियों में हृदयरोग, पार्किंसन रोग, मूत्राशय के कैंसर और किडनी रोग व अस्थमा शामिल हैं। वहीं वह कई बार कोविड-19 संक्रमण की चपेट में भी आ चुका है।
ट्रम्प ने पिछले महिने की थी ये घोषणा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने घोषणा की थी कि उनके प्रशासन ने “दुनिया के सबसे बुरे लोगों में से एक” राणा के भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी है, ताकि वह 26/11 के मुंबई हमले में संलिप्तता को लेकर “भारत में मुकदमे का सामना कर सके।” वहीं पीएम मोदी ने भी इस कदम के लिए ट्रंप का आभार व्यक्त किया।
भारत लंबे समय से कर रहा प्रत्यर्पण की मांग
तहव्वुर राणा पाकिस्तानी-अमेरिकी आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली का एक जाना-माना सहयोगी है, जो 26 नवंबर, 2008 को मुंबई में हुए हमलों के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक था, जिसमें 174 लोग मारे गए थे। उसे प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) का समर्थन करने के लिए अमेरिका में दोषी ठहराया गया था और भारत लंबे समय से उसके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है।
भारत में राणा के साथ क्या होगा
भारत लाए जाने के बाद राणा को विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अदालत में पेश किए जाने की उम्मीद है, जिसके बाद एनआईए पूछताछ के लिए उसकी हिरासत की मांग करेगी। प्रत्यर्पण को भारतीय एजेंसियों और सरकार के लिए एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
अदालत ने राणा को 14 साल की कैद की सजा सुनाई।
राणा को डेनमार्क में विफल हमले के लिए रसद सहायता प्रदान करने के लिए दोषी ठहराया गया था, लेकिन भारत में आतंकवादी गतिविधियों के लिए उसे बरी कर दिया गया था। जिला अदालत ने राणा को 14 साल की कैद की सजा सुनाई। आतंकवादी डेविड हेडली ने भी अदालत में राणा के खिलाफ गवाही दी।
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