नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । अब किसी को बिहारी, जाट, चिंकी-पिंकी कहने या बुलाने पर भी रैगिंग का मामला दर्ज होगा। इसे लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को कड़ा निर्देश जारी किया है। और कहा कि रैगिंग के मामलों में अब सिर्फ शारीरिक या मानसिक उत्पीड़न ही नहीं, बल्कि भाषा, क्षेत्र, जाति, रंग, धर्म, लिंग, जन्म स्थान या आर्थिक पृष्ठभूमि पर की गई कोई भी टिप्पणी भी रैगिंग मानी जाएगी।
UGC ने एंटी रैगिंग गाइडलाइन 2025 जारी की है। मानसिक व शारीरिक शोषण के अलावा जाति-धर्म, लिंग, क्षेत्रीय मूल-भाषाई पहचान, निवास स्थान या आर्थिक पृष्ठभूमि के आधार पर किसी तरह की टिप्पणी करने पर रैगिंग के तहत केस दर्ज होगा। यानी अब किसी को ‘बिहारी’, ‘जाट’, ‘चिंकी-पिंकी’ जैसी शब्दों का इस्तेमाल कर उसे पुकाराना भी कानूनन अपराध होगा। यह नई गाइडलान IIT, IIM, मेडिकल, लॉ समेत सभी संस्थानों पर नए नियम लागू होंगे।
नए सेशन से पहले संस्थानों को कड़े निर्देश
देशभर के विश्वविद्यालयों और संस्थाओं में नए सत्र 2025 की प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसी को ध्यान में रखते हुए UGC ने सभी संस्थानों चाहे वो IIT, IIM, NIT, मेडिकल, लॉ, इंजीनियरिंग या मैनेजमेंट कॉलेज हों को सख्ती से एंटी-रैगिंग रेग्युलेशन 2009 और नई संशोधित गाइडलाइन का पालन करने के निर्देश दिए है।
कैंपस में दिखेगी सख्ती
अब हर संस्थान और कॉलेजों के अपने कैंपस में एंटी-रैगिंग समिति का गठन किया जाएगा। ये कमेटी कैंटीन, हॉस्टल, शौचालय, बस स्टैंड जैसे स्थानों का औचक निरीक्षण करेगी। इसके अलावा, अब डार्क प्लेस यानी ऐसे कोने जहां आमतौर पर निगरानी नहीं होती, वहां CCTV कैमरे लगाने होंगे। छात्रों से संवाद और काउंसलिंग को नियमित रूप से किया जाएगा, ताकि रैगिंग की शुरुआत में ही खतरे को भांपा जा सके।
वीडियो के जरिए होगा जागरूकता अभियान
जहां पहले सिर्फ पोस्टर और वर्कशॉप के जरिए छात्रों को जागरूक किया जाता था, अब यूजीसी छोटे-छोटे वीडियो के जरिए अभिभावकों, छात्रों और शिक्षकों तक एंटी-रैगिंग का संदेश भेजा रहा है। इस कदम का उद्देश्य छात्रों को भावनात्मक और मानसिक स्तर पर भी मजबूत बनाना है।
ऑनलाइन आवेदन में भी बदलाव
अब कॉलेज में प्रवेश फॉर्म में एंटी-रैगिंग की जानकारी देनी होगी और छात्रों व उनके माता-पिता से रैगिंग न करने का शपथपत्र लेना जरुरी होगा। यह एक कानूनी दस्तावेज होगा जिसमें छात्र को लिखित में वादा करना होगा कि वह किसी भी प्रकार की रैगिंग में भाग नहीं लेगा। वही, हर संस्थान की वेबसाइट पर एंटी-रैगिंग कमेटी के सदस्यों के नाम, मोबाइल नंबर, लैंडलाइन, ईमेल आदि की जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। यदि किसी भी तरह की शिकायत आती है तो तुरंत कार्रवाई की जाएगी।




