नई दिल्ली, रफ्तार न्यूज। सुप्रीम कोर्ट ने आज 3 अक्टूबर को 1998 में बिहार के मंत्री बृज बिहारी प्रसाद की हत्या के मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने पूर्व सांसद सूरज भान सिंह समेत 6 आरोपियों को बरी कर दिया जबकि 2 लोगों को दोषी ठहराया है। इन दोषियों को उम्रकैद की सजा दी गई है। इससे पहले पटना हाई कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। जस्टिस संजय कुमार, जस्टिस संजीव खन्ना, और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने यह फैसला सुनाया है।
15 दिनो के अंदर सरेंडर करने का आदेश
दोषी मुन्ना शुक्ला और मंटू तिवारी को कोर्ट ने उम्रभर जेल में रहने की सजा सुनाई है और उन्हें 15 दिनों के भीतर सरेंडर करने को कहा है। कोर्ट ने पूर्व सांसद सूरज भान सिंह और राजन तिवारी समेत 6 लोगों को बरी कर दिया है।
सबूतों की कमी के कारण 8 आरोपी बरी किए गए
पटना हाई कोर्ट ने 2014 में सबूतों की कमी के कारण 8 आरोपियों को बरी कर दिया था। कोर्ट ने JDU के नेता विजय कुमार शुक्ला, पूर्व सांसद सूरज भान और पूर्व विधायक राजन तिवारी को भी बरी किया था। लेकिन इस फैसले को बृज बिहारी की पत्नी रमा देवी और CBI ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
रमा देवी BJP से सांसद भी रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्त को इस मामले में सुनवाई पूरी की और आज फैसला सुनाया, जिसमें 6 आरोपियों को बरी कर दिया गया और 2 को दोषी ठहराया गया।
क्या है पूरा मामला?
बृज बिहारी प्रसाद की हत्या 13 जून 1998 को पटना के इंदिरा गांधी मेडिकल इंस्टीट्यूट में हुई थी। UP के माफिया डॉन श्री प्रकाश शुक्ला ने AK-47 से ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर उनकी हत्या कर दी थी। इस हत्या के बाद बृज बिहारी की पत्नी रमा देवी ने आरोप लगाया था कि लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार ने उनके पति की हत्या कराई ताकि बृज बिहारी बिहार के मुख्यमंत्री न बन सकें।






