नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। दिल्ली की जीत से गदगद बीजेपी की खुशियों में उनकी ही पार्टी के तीन नेता आड़े आ रहे हैं। दिल्ली के पड़ोसी राज्य हरियाणा में अनिल विज ने अपने ही मुख्यमंत्री सिंह सैनी के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। जबकि राजस्थान में भी किरोड़ी लाल मीणा बीजेपी के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। वह भी खुलेआम विधानसभा में अपनी ही सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे है। महाराष्ट्र में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। अपनी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने वाली पंकजा मुंडे भी महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ बगावती तेवर अपना चुकी हैं।
पंकजा मुंडे की नाराजगी की क्या वजह है?
पंकजा मुंडे ने महाराष्ट्र की सियासत में उस समय हलचल पैदा कर दी जब रविवार को उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा कि उनके पिता गोपीनाथ मुंडे के समर्थकों की संख्या इतनी है कि वह कभी भी एक नया राजनीतिक दल बना सकती हैं। उनके उस बयान के पीछे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि वह बीजेपी सरकार से बगावत के मूड मे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि महाराष्ट्र सरकार में अपनी नजरअंदाजगी से पंकजा मुंडे नाराज हैं। साल 2014 में भी उन्हें केवल मंत्री पद से संतोष करना पड़ा। साल 2019 में अपनी चुनावी हार के पीछे भी उन्होंने अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं को इसका कारण बताया। ऐसे भी कोई मौके आए जब पंकजा मुंडे के समर्थक उम्मीद कर रहे थे कि उन्हें राज्यसभा भेजा जाए लेकिन ऐसा भी नहीं हो सका। इसलिए उनके बगावती सुर इसी का कारण हैं।
अनिल विज भी बगावती मूड में हैं
हरियाणा के गब्बर कहे जाने वाले अनिल विज भी मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के खिलाफ बयान दे रहे हैं। इसके चलते हरियाणा बीजेपी ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है जिसका जवाब 3 दिन में देने के लिए कहा गया है। अनिल विज की नाराजगी की वजह उस समय भी सामने आई थी जब हरियाणा विधानसभा चुनाव में पार्टी ने जीत दर्ज की। अनिल विज का नाम सीएम पद के लिए सामने आ रहा था लेकिन ताज नायब सिंह सैनी के सिर सजा। इसके बाद से ही वह सीएम की खिलाफत करते दिखाई दे रहे हैं।
किरोड़ी लाल मीणा राजस्थान सरकार पर हमलावर
किरोड़ी लाल मीणा भी राजस्थान की भजनलाल सरकार पर हमलावर हैं। हाल ही में उन्होंने आरोप लगाया कि हमारी सरकार अपने ही मंत्री का फेन टेप करा रही है। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि प्रदेश की CID को भी पीछे लगा दिया गया है। उन्होंने यह आरोप लगाया कि मंत्री होने के बाद भी ट्रांसफर पोस्टिंग में उनकी नहीं सुनी जा रही।





