नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। देश के सर्वोच न्यायालय ने 2 सितंबर 2024 को उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में अपराधियों के खिलाफ बुलडोजर की कार्रवाई वाली याचिकाओं को लेकर सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सवाल किया कि किसी के घर को सिर्फ इसलिए बुलडोजर से गिराया जा रहा है, क्योंकि वह आरोपी है।
हम इसको लेकर दिशानिर्देश बनाएंगे: SC
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में डाली गयी याचिकाओं में आरोपियों के घरों को बिना किसी नोटिस के बुलडोजर से गिराने के आरोप लगे हैं। इसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है। सर्वोच न्यायालय में सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस गवई के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि म्युनिसिपल नियमों के तहत ही नोटिस देकर अवैध निर्माण को गिराया जा सकता है । सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता के जवाब के बाद कहा कि हम इसको लेकर दिशानिर्देश बनाएंगे। जिसका सभी राज्यों को पालन करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने अब बुलडोजर की कार्रवाई वाले मामले की सुनवाई 17 सितंबर 2024 को रखी है।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उठाए कदमों की सराहना करते हैं: जस्टिस गवई
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में जस्टिस गवई ने उत्तर प्रदेश सरकार के एफिडेविट को लेकर कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा है कि अचल संपत्ति को कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए ही ध्वस्त किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश के विशेष गृह सचिव ने भी एफिडेविट दाखिल किया है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस गवई ने कहा कि वे अखिल भारतीय स्तर पर इसको लेकर दिशा-निर्देश जारी करेंगे, ताकि बताई गई चिंताओं का हल किया जा सके। इसके बाद जस्टिस गवई ने कहा कि वे उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उठाए कदमों की सराहना करते हैं।
इस मामले में पक्षकारों के वकील अपना सुझाव रखें
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस गवई ने कहा कि इस मामले में पक्षकारों के वकील अपना सुझाव रखें, जिससे कोर्ट ऐसे दिशा- निर्देश जारी कर सके, जिसको अखिल भारतीय स्तर पर लागू किया जा सके। जस्टिस गवई ने पक्षकारों के वकीलों से अपने सुझावों को सीनियर एडवोकेट नचिकेता जोशी को सौंपने के लिए कहा है।





