संवैधानिक मान्यता हासिल होने के 73 साल बाद भी हिंदी की दुनिया सिर्फ दो शब्दों ‘चाहिए’ और ‘हो’ के बीच ही झूल रही है। जबकि उसे अब तक ‘हुई’ की श्रेणी में आ जाना चाहिए था। हिंदी को लेकर जब भी कोई सरकारी आयोजन होता है, हिंदी से जुड़ी समितियों क्लिक »-www.prabhasakshi.com




