back to top
23.5 C
New Delhi
Thursday, April 9, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

भारतीय नौसेना से विदा हुआ पहला विध्वंसक जहाज ‘राजपूत’

– सूर्यास्त के समय जहाज से उतारा गया राष्ट्रीय ध्वज, नौसेना पताका और डीकमिशनिंग पेनेंट – नौसेना की पूर्वी कमान के फ्लैग ऑफिसर ने जहाज की याद में जारी किया विशेष डाक कवर सुनीत निगम नई दिल्ली, 21 मई (हि.स.)। भारतीय नौसेना के पहले काशीन-श्रेणी के विध्वंसक आईएनएस राजपूत को 41 शानदार वर्षों तक देश की सेवा करने के बाद शुक्रवार को सेवामुक्त कर दिया गया। विशाखापत्तनम में एक भव्य समारोह के दौरान जहाज से राष्ट्रीय ध्वज, नौसेना पताका और डीकमिशनिंग पेनेंट को सूर्यास्त के समय उतारा गया। नौसेना की पूर्वी कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ एबी सिंह की उपस्थिति में इस अवसर पर विशेष डाक कवर का विमोचन किया गया। भारतीय नौसेना में डी-51 नामक इस राजपूत वर्ग के जहाज की प्रमुख विध्वंसकों में गिनती होती रही है। इस जहाज ने मुख्य रूप से सुपरसोनिक ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल के लिए परीक्षण मंच के रूप में कार्य किया है। राष्ट्र के लिए अपनी चार दशकों की शानदार सेवा के दौरान जहाज को ‘राज करेगा राजपूत’ के आदर्श वाक्य और अदम्य भावना के साथ पश्चिमी और पूर्वी दोनों बेड़े में सेवा करने का गौरव हासिल है। डी-51 नामक इस राजपूत वर्ग के जहाज की प्रमुख विध्वंसकों में गिनती होती रही है। राजपूत वर्ग का यह जहाज सोवियत काशिन श्रेणी के विध्वंसक का संशोधित संस्करण है। डिजाइन में बदलाव करके इसे भारतीय नौसेना के लिए पूर्व सोवियत संघ में बनाया गया था। आईएनएस राजपूत का निर्माण निकोलेव (वर्तमान में यूक्रेन) में 61 कम्युनार्ड्स शिपयार्ड में उनके मूल रूसी नाम ‘नादेज़नी’ यानी ‘होप’ के तहत किया गया था। जहाज के निर्माण की शुरुआत 11 सितम्बर, 1976 को हुई थी और 17 सितम्बर, 1977 को लॉन्च किया गया था। राजपूत वर्ग के इस प्रमुख जहाज को 04 मई, 1980 को पोटी, जॉर्जिया में यूएसएसआर में भारत के तत्कालीन राजदूत आईके गुजराल और जहाज के पहले कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन गुलाब मोहनलाल हीरानंदानी ने नौसेना के बेड़े में शामिल किया था। यह भारतीय सेना की राजपूत रेजिमेंट से संबद्ध होने वाला पहला भारतीय नौसेना जहाज भी था। तत्कालीन कमोडोर गुलाब मोहनलाल हीरानंदानी बाद में नौसेना के वाइस एडमिरल भी बने। राजपूत ने सुपरसोनिक ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल के लिए एक परीक्षण मंच के रूप में कार्य किया। इसके बाद 1980 के दशक में भारत को निर्यात के लिए इस वर्ग के आईएनएस राणा, आईएनएस रणवीर और आईएनएस रणविजय का निर्माण किया गया था। ये सभी जहाज मौजूदा समय में पूर्वी नौसेना कमान से जुड़े हैं। अपनी शानदार 41 वर्षों की सेवा के दौरान इस जहाज ने 31 कमांडिंग ऑफिसर देखे हैं। जहाज के आखिरी कमांडिंग ऑफिसर ने 14 अगस्त, 2019 को कमान संभाली थी। आईएनएस राजपूत ने राष्ट्र को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से कई अभियानों में भाग लिया है। इनमें से श्रीलंका में ऑपरेशन अमन, श्रीलंका के तट पर गश्ती कर्तव्यों के लिए ऑपरेशन पवन, मालदीव से बंधक स्थिति को हल करने के लिए ऑपरेशन कैक्टस और लक्षद्वीप से ऑपरेशन क्रॉसनेस्ट शामिल हैं। इसके अलावा जहाज ने कई द्विपक्षीय और बहुराष्ट्रीय अभ्यासों में भाग लिया है। आईएनएस राजपूत पर लगी नौसेना की पताका और कमीशनिंग पेनेंट को आज शाम सूरज डूबने के साथ नीचे उतार लिया गया जो नौसेना से उसकी विदाई का प्रतीक है। हिन्दुस्थान समाचार

Advertisementspot_img

Also Read:

Merchant Navy में बनाना चाहते हैं अपना करियर तो टाइम रहते कर लें ये कोर्सेज, जानिए कितनी मिलती है सैलरी?

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। Merchant Navy रोजगार का एक प्रमुख जरिया बनकर उभरा है। लोग इस क्षेत्र में अपना करियर बनाने में जी तोड़ मेहनत...
spot_img

Latest Stories

Allu Arjun की फिल्म Raaka के पोस्टर पर Shah Rukh Khan ने किया रिएक्ट, जानिए क्या कहा?

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। अल्लू अर्जुन (Allu Arjun) के...

Share Market Today: हफ्ते के चौथे दिन भारतीय शेयर बाजार लाल, तेजी पर लगा ब्रेक; Sensex टूटा, Nifty भी लाल निशान में

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 9...

Assembly Election 2026: वोटर लिस्ट में नाम नहीं? जानिए क्या करें और कैसे डालें वोट

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। Assembly Elections 2026 के दौरान अक्सर...

Gold & Petrol Diesel Price Today: सोना हुआ सस्ता, कच्चे तेल में उछाल के बावजूद पेट्रोल-डीजल स्थिर

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। मिडिल ईस्ट में Iran और United...

कब मनाई जाएगी Mohini Ekadashi? जानें सही डेट और पूजा विधि

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। हिन्दू धर्म में एकादशी तिथि...

पिएं ये खास जूस, बाल बने रहेंगे काले और घने

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। अगर इस समय आप अपने...
⌵ ⌵ ⌵ ⌵ Next Story Follows ⌵ ⌵ ⌵ ⌵