नेल्लौर, 24 मई (हि.स.)। आंध्र प्रदेश के नेल्लौर जिले के कृष्णापट्टनम में कोरोना की कथित आयुर्वेदिक औषधि के वैज्ञानिक परीक्षण करने के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने अभी तक कोई पहल नहीं की है। राज्य का आयुष विभाग इस कथित औषधि को लेकर आज शाम तक अपनी रिपोर्ट दे सकता है। राज्य सरकार ने परंपरागत दवाओं के प्रयोग करने में कोई आपत्ति नहीं जताई है। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम ट्रस्ट (टीटीडीटी) ने इस औषधि को लोगों को पहुंचाने की व्यवस्था कर ली है, बस उसे राज्य सरकार से वितरण की अनुमति का इंतजार है। दरअसल, कृष्णापट्टनम के एक आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. अनंदय्या ने कोरोना की दवा विकसित करने का दावा किया है। इस दवा को लेने के लिए लोगों की भारी उमड़ने और कोरोना गाइडलाइन का पालन न होने पर राज्य सरकार ने इस कथित दवा के वितरण पर प्रतिबंध लगा दिया है। साथ ही सरकार ने इस दवा का आईसीएमआर से वैज्ञानिक परीक्षण कराने के आदेश दिए हैं। लेकिन जिला प्रशासन ने बताया कि आईसीएमआर का दल अभी तक नेल्लौर नहीं पहुंचा है। इसी बीच कोरोना की दवा को लेकर राज्य का आयुष विभाग अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप सकता है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने बताया है कि राज्य के आयुष विभाग के विशेषज्ञों का दल इस दवा को लेकर अपनी रिपोर्ट सौंप देगा, तभी राज्य सरकार इस बारे में अंतिम फैसला करेगी इसी बीच राज्य सरकार के प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) अनिल कुमार सिंघल ने कहा कि परंपरागत पद्धति, जो पिछले कई सालों से चल रही है, उसे बरकरार रखने में कोई आपत्ति नजर नहीं आ रही है। वह पिछले कई सालों से इस परंपरागत पद्धति का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसे आयुर्वेदिक दवा घोषित किये बिना भी जारी रखने में कोई आपत्ति नहीं है। स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि डॉ. अनंदय्या की कथित कृष्णपटनम दवा का अब तक कोई नकारात्मक प्रभाव देखने को नहीं मिला और इसे तैयार करने में इस्तेमाल हो रही सभी सामग्री सुरक्षित प्रमाणित हो चुकी हैं। सिंघल ने कहा कि उनके विभाग के अधिकारी उन मरीजों के संपर्क में है, जिन्होंने इस औषधि का इस्तेमाल किया है। बताया गया है कि तिरुपति के आयुर्वेदिक कॉलेज का एक दल भी इस दवा को बनाने के काम में जुटा है। इस बीच तिरुमला तिरुपति देवस्थानम ट्रस्ट के सदस्य भास्कर रेड्डी ने बताया कि आयुर्वेदिक विशेषज्ञों ने इस औषधि का अध्ययन कर लिया है और इसकी तैयारी में वे दो दिन से जुटे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें राज्य सरकार से अनुमति मिलने के बाद इस औषधि का वितरण शुरू कर देंगे। इसमें उपयोग की जाने वाले जड़ी बूटी पर्याप्त मात्रा में तिरुपति के वन क्षेत्र में उपलब्ध हैं। स्थानीय विधायक गोवर्धन रेड्डी का कहना है कि इस दवा के वितरण की सरकार से अनुमति मिलने के बाद दवा के वितरण की व्यवस्था कोरोना नियमावली का पालन करते हुए की जायेगी। दवा का वितरण खुले मैदान में होगा और कुछ दिन बाद ऑनलाइन भी औषधि को भेजने की व्यवस्था की जायेगी। हिन्दुस्थान समाचार /नागराज
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