नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने खनिज समृद्ध राज्यों के पक्ष में बड़ा ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। यह खनिज समृद्ध राज्यों के लिए बड़ी जीत है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों द्वारा खनिज वाली भूमि पर रॉयल्टी लगाने के अधिकार को बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने अपने ऐतिहासिक 8:1 फैसले में कहा है कि रॉयल्टी टैक्स की तरह नहीं है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच में 9 सदस्य थे, जिसमे से जस्टिस बीवी नागरत्ना ने इस मामलें में अपनी असहमति वाला फैसला सुनाया। लेकिन इस मामले में 8:1 के ऐतिहासिक फैसले से खनिज समृद्ध राज्यों की जीत हुई।
रॉयल्टी को टैक्स नहीं कहा जा सकता है
सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने खनिज पर लगाए जाने वाले टैक्स को लेकर दाखिल याचिकाओं पर यह बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि राज्य सरकार के पास खनिज वाली जमीन पर टैक्स लगाने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा है कि रॉयल्टी को टैक्स नहीं कहा जा सकता है। यह कोई टैक्स नहीं है।
रॉयल्टी खनन पट्टे के कारण आती है
सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने अपने फैसले में साफ कर दिया है कि रॉयल्टी कोई टैक्स नहीं है। अब सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद झारखंड, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, असम और उत्तर-पूर्व के खनिज समृद्ध राज्यों को इसका लाभ होगा। सुप्रीम कोर्ट ने अपने इस मामले की सुनवाई में कहा है कि रॉयल्टी खनन पट्टे के कारण आती है। जिसको निकाले गए खनिजो की मात्रा के अनुसार तय किया जाता है। रॉयल्टी पट्टादाता और पट्टाधारक के बीच एग्रीमेंट की शर्तो पर आधारित होती है और भुगतान सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए नहीं होता है बल्कि विशेष उपयोग शुल्क के लिए ही होता है।
इंडिया सीमेंट्स के फैसले में रॉयल्टी को टैक्स बताना ठीक नहीं है
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार को देय एग्रीमेंट भुगतान को टैक्स नहीं कहा जा सकता है। मालिको को जो रॉयल्टी मिलती है वो खनिजो को अलग करने के लिए मिलती है। वहीं रॉयल्टी को लीज डीड द्वारा जब्त कर लिया जाता है और टैक्स लगाया जाता है। सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने कहा कि इंडिया सीमेंट्स के फैसले में रॉयल्टी को टैक्स बताना ठीक नहीं है, यह गलत है।
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