नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसे शख्स की सजा खारिज कर दी है, जिस पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप था। शख्स की प्रेमिका ने आत्महत्या की थी और उस पर आरोप था कि प्रेमिका ने ब्रेकअप की वजह से आत्महत्या की थी। कोर्ट ने कहा कि किसी से शादी करने से इनकार करना आत्महत्या के लिए उकसाने के बराबर नहीं होगा। कोर्ट ने कहा कि जब तक ये साबित नहीं होता कि आरोपी ने ऐसे हालात बना दिए कि मृतक के अलावा आत्महत्या करने के अलावा कोई ऑप्शन न बचा होगा।
जस्टिस मित्तल ने अपने फैसले में लिखा कि दोनों पक्षों के बीच प्रेम था और यह ब्रेकअप का मामला है। इसे आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं कहा जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि आरोपी ने किसी भी तरीके से मृतक को आत्महत्या करने के लिए नहीं उकसाया था।
ब्रेकअप जिंदगी का हिस्सा है
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालतों ने हमेशा माना है कि समाज में घरेलू जीवन में कलह और मतभेद काफी आम हैं। जस्टिस मित्तल ने 17 पन्नों के अपने फैसले में लिखा कि महिला की मौत से पहले के दो बयानों का विश्लेषण किया गया और कहा कि न तो जोड़े के बीच शारीरिक संबंध का कोई आरोप था और न ही आत्महत्या के लिए उकसाने की कोई घटना हुई। इसलिए फैसले में इस बात पर जोर दिया गया कि टूटे हुए रिश्ते भावनात्मक रूप से परेशान करने वाले होते हैं। लेकिन वे स्वत: आपराधिक कृत्य की श्रेणी में नहीं आते।
न्यायालय ने यह भी कहा, ‘निश्चित रूप से जब तक आरोपी का आपराधिक इरादा स्थापित नहीं हो जाता, तब तक उसे IPC की धारा 306 के तहत दोषी ठहराना संभव नहीं है।’ फैसले में कहा गया कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जो यह साबित कर सके कि आरोपी ने महिला को आत्महत्या के लिए उकसाया है।





