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सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली ग्रुप के पूर्व सीएफओ की जमानत याचिका खारिज की

नई दिल्ली, 30 मार्च (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आम्रपाली समूह के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) चंद्र प्रकाश वाधवा की मेडिकल आधार पर दायर जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति यू.यू. ललित ने मेडिकल बोर्ड द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट पर गौर किया, जिसमें संकेत दिया गया था कि वाधवा की सेहत काफी स्थिर है। वरिष्ठ अधिवक्ता अमन लेखी ने शीर्ष अदालत के समक्ष वाधवा का प्रतिनिधित्व किया। पीठ में शामिल जस्टिस एस. रवींद्र भट और जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा ने वाधवा की जांच के लिए एक मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया था। पीठ ने अपने आदेश में कहा, रिपोर्ट को रिकॉर्ड में रखा गया है, जो दर्शाता है कि मुख्य चिकित्सा अधीक्षक और न्यूरोलॉजी, आथोर्पेडिक सर्जरी, कार्डियोलॉजी और मेडिसिन विभाग के प्रमुख बोर्ड के सदस्य थे। याचिकाकर्ता की जांच के बाद बोर्ड द्वारा रिपोर्ट तैयार की गई है। जैसा कि रिपोर्ट से संकेत मिलता है, याचिकाकर्ता की चिकित्सा स्थिति काफी स्थिर है। पीठ ने आगे कहा कि रिकॉर्ड इंगित करता है कि याचिकाकर्ता पहले ही एक साल और चार महीने की वास्तविक हिरासत पूरी कर चुका है। पीठ ने कहा, ऐसा प्रतीत होता है कि प्रवर्तन निदेशालय द्वारा कुल तीन शिकायतें दर्ज की गई हैं और याचिकाकर्ता एकमात्र ऐसा व्यक्ति है, जिसका तीसरी शिकायत में दो कॉर्पोरेट संस्थाओं के अलावा एक आरोपी के रूप में जिक्र किया गया है। पीठ ने अपने आदेश में कहा, हम ये निर्देश देते हैं : ए- आरोप तय करने के लिए सभी तीन शिकायतों पर तुरंत गौर किया जाएगा। बी- अभ्यास को सुविधाजनक बनाने के लिए आरोपी को 6 अप्रैल को संबंधित अदालत के समक्ष पेश किया जाए या उपस्थित रहे, जैसा कि निर्देश दिया गया है। सी- मामले पर सही ढंग से विचार किया जाएगा। डी- याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोप तय होने की स्थिति में याचिकाकर्ता जमानत के लिए प्रार्थना को नवीनीकृत करने के लिए स्वतंत्र होगा। ई-आरोप तय करने के स्तर पर यदि कोई मामला हो, तो उस पर विशुद्ध रूप से उसके गुण के आधार पर विचार किया जाएगा। पीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली वाधवा की अपील को खारिज करते हुए कहा, यदि याचिकाकर्ता के पास जमानत के लिए आवेदन करने का कोई अवसर है, तो दिए गए निर्देशों के अनुसार इसे भी पूरी तरह से अपने गुणों के आधार पर माना जाएगा। शीर्ष अदालत ने 14 मार्च को निर्देश दिया था कि वाधवा को सात दिनों के भीतर किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ के चार चिकित्सा पेशेवरों वाले मेडिकल बोर्ड के समक्ष पेश किया जाना चाहिए। इसने बोर्ड को जांच करने और एक रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया। आम्रपाली के पूर्व ग्रुप डायरेक्टर अनिल कुमार शर्मा, शिव प्रिया और अजय कुमार सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जेल में हैं। –आईएएनएस एसजीके/एएनएम

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