नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। दिल्ली शराब नीति घोटाले में CBI के द्वारा दर्ज मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जमानत दे दी है। दिल्ली सीएम को जमानत देने के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस भुइयां ने CBI की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि देश की प्रमुख जांच एजेंसी होने के नाते CBI को मनमाने तरीके से गिरफ्तारी करते हुए नहीं देखा जाना चाहिये। बल्कि उसे पिंजरे से बाहर निकले हुए तोते की तरह देखा जाना चाहिये। CBI को किसी भी तरह के पक्षपात से बचना चाहिये।
‘पिंजरे में बंद तोते की धारणा से CBI को आना चाहिये बाहर’
जस्टिस भुइयां ने कहा कि “CBI देश की एक प्रमुख जांच एजेंसी है। यह जनहित में है कि CBI ना केवल इमानदार हो, बल्कि उसे ऐसा दिखना भी चाहिये। सीबीआई को इस धारणा से दूर होने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिये कि उसकी जांच निष्पक्ष और पक्षपात से रहित है। सीजर की पत्नी की तरह ही एक जांच एजेंसी को इमानदार होना चाहिये। कुछ समय पहले अदालत ने CBI को पिंजरे में बंद तोता कहा था, CBI को पिंजरे में बंद तोते की धारणा से बाहर आने के लिए उसे वैसे ही काम करना चाहिये।”
दोनों जजों की राय एक दूसरे से रही अलग
गौरतलब है कि दिल्ली उच्च न्यायालय के 5 अगस्त के आदेश को चुनौती देने वाली दिल्ली सीएम की याचिका पर आज न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्जवल भुइयां की पीठ ने फैसला सुनाया। इस मामले में विस्तृत सुनवाई के बाद पीठ ने 5 सितंबर को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्जवल भुइयां का अरविंद केजरीवाल मामले में अलग-अलग मत देखने को मिला। एक तरफ जहां जस्टिस सूर्यकांत को CBI की गिरफ्तारी में कोई गलती नहीं मिली। वहीं जस्टिस भुइयां ने केजरीवाल की गिरफ्तारी की आवश्यकता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल की हिरासत पूरी तरह से अस्वीकार्य है। वो भी तब जब उन्हें शराब नीति घोटाले से उत्पन्न धन शोधन मामले में पहले ही जमानत मिल चुकी है।
CBI की गिरफ्तारी बिल्कुल है अनुचित
जस्टिस भुइयां ने कहा कि “जब CBI ने 22 महीनों तक अपीलकर्ता को गिरफ्तार करने की आवश्यकता महसूस नहीं की तो मैं ये समझने में असफल हूं कि जब वो हिराई के कगार पर थे तो उसे गिरफ्तार करने में इतनी जल्दबाजी क्यों की गई। मेरा मत है कि CBI के द्वारा अपीलकर्ता की गिरफ्तारी अनुचित है। वो भी तब जब अपीलकर्ता को PMLA के कठोर प्रावधानों के तहत जमानत दी गई। इसलिए उसी अपराध के संबंध में CBI के द्वारा अपीलकर्ता को आगे की हिरासत में रखना पूरी तरह से अस्वीकार्य हो गया”
इस तरह की गिरफ्तारी CBI पर लगाती है सवालिया निशान
न्यायमूर्ति भुइयां ने कहा कि CBI के द्वारा अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी ऐसा लग रहा है जैसे कि ED मामले में केजरीवाल को दी गई जमानत को विफल करने के लिए की गई हो।
न्यायमूर्ति भुइयां ने कहा कि “ऐसा लग रहा है कि ED मामले में विशेष न्यायाधीष के द्वारा अपीलकर्ता को नियमित जमानत देने के बाद ही CBI सक्रिय हुई और उसने अपीलकर्ता की हिरासत की मांग की। जबकि CBI को 22 महीने से अधिक समय तक अपीलकर्ता को गिरफ्तार करने की जरूरत महसूस नहीं हुई”
उन्होंने आगे कहा कि “CBI की इस तरह की कार्रवाई गिरफ्तारी पर ही सवालिया निशान लगाती है। इन परिस्थितियों में यह मना जा सकता है कि CBI के द्वार अचानक की गई गिरफ्तारी शायद ED मामले में अपीलकर्ता को दी गई जमानत को विफल करने के लिए की गई थी।”
26 जून 2024 को CBI ने दिल्ली सीएम को किया था गिरफ्तार
बता दें कि अरविंद केजरीवाल को 26 जून 2024 को CBI ने औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया था। उस समय केजरीवाल कथित शराब घोटाले से उत्पन्न मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED की हिरासत में थे। इस मामले में 12 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को मनी लॉन्ड्रिंग केस में अंतरिम जमानत दे दी, जबकि ED की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका को बड़ी बेंच को भेज दिया।




