नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। दिल्ली आबकारी नीति में भ्रष्टाचार के मामले में SC ने अरविंद केजरीवाल को जमानत दी। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जवल की बेंच ने जमानत वाले मामले में एकमुश्त फैसला देकर अरविंद केजरीवाल की जमानत पर मुहर लगा दी है। हालांकि SC ने उन पर कुछ पाबंदिया भी लगाई है जिसके तहत वह मामले के गवाहों से नही मिल सकते और कोई भी फाइल साइन नहीं कर सकेंगे। हालांकि CBI द्वारा अवैध गिरफ्तारी के मामले में दोनों जस्टिस की अलग अलग राय सामने आई है। जस्टिस सूर्यकांत ने गिरफ्तारी को वैध माना जबकि जस्टिस उज्जवल भुइयां ने गिरफ्तारी को लेकर संशय जाहिर किया।
177 दिन के बाद मिली रेगुलर जमानत
अरविंद केजरीवाल को ये रेगुलर जमानत 177 दिन के बाद दी गई है हालांकि लोकसभा चुनाव के दौरान भी उन्हें 21 दिन की राहत दी गई थी। आपके बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी करने के बाद फैलसा सुरक्षित रख लिया था।
क्या थी नई आबकारी नीति
दिल्ली सरकार नई आबकारी नीति 2021-22 लेकर आई थी। इस नीति के तहत शराब खरीदने का नया अनुभव लोगों को देना चाहती थी। नई नीति के अनुसार होटलों के बार, क्लब्स और रेस्टोरेंट्स को रात 3 बजे तक ओपन रखने की छूट दी गई थी। इसमें छत समेत खुली जगह पर भी शराब परोसने की इजाजत दी गई थी। इससे पहले तक, खुले में शराब परोसने का अनुमति नहीं थी। बार में किसी भी तरह के मनोरंजन का इंतजाम करने का भी प्रावधान था। इसके अलावा बार काउंटर पर खुल चुकीं बोतलों की शेल्फ लाइफ पर वापस रखने पर कोई रोक नहीं रखी गई थी। नई पॉलिसी के तहत किसी भी शराब की दुकान पर सरकार का मालिकाना हक नहीं रखने का प्रावधान था। नई पॉलिसी में कंज्यूमर की चॉइस और ब्रैंड्स की उपलब्धता को तवज्जो दी गई थी। इसका उद्देश्य स्मगलिंग और बूटलेगिंग रोकना था। नई पॉलिसी की सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि ई-टेंडरिंग के जरिए हर जोन ऑपरेटर के लिए नया L-7Z लाइसेंस दिया जाए।




