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Saturday, March 14, 2026
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SC का जमीयत उलेमा-ए-हिंद की याचिका पर बड़ा फैसला, अब राज्य सरकारें नहीं रोक सकेंगी मदरसों का फंड

सुप्रीम कोर्ट ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद की याचिका पर बड़ा फैसला सुनाया है। SC ने बाल अधिकार संस्था NCPCR की मदरसों को लेकर की गई सिफारिशों पर रोक लगा दी है।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। देश के सर्वोच्च न्यायालय ने 21 अक्टूबर 2024 को बाल अधिकार संस्था NCPCR की मदरसों को लेकर की गई सिफारिशों पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद, अब राज्य सरकार उन मदरसों की भी फंडिंग नहीं रोक पाएगी, जो शिक्षा का अधिकार नियम का पालन नहीं कर रहे हैं। इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों के छात्रों को सरकारी स्कूलों में भेजने की एनसीपीसीआर की सिफारिशों को भी खारिज कर दिया है।

अन्य राज्यों को भी अपनी याचिका में पक्षकार बनाने की अनुमति दी

CJI डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने 21 अक्टूबर 2024 को यह फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने यह याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद की तरफ से पेश वकीलों की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि NCPCR और कुछ राज्यों की मदरसों को लेकर की गई कार्रवाइयों पर रोक लगाने की जरूरत है।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने उत्तर प्रदेश और त्रिपुरा की सरकारों के उस निर्देश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमे कहा गया था कि गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों के छात्रों को सरकारी स्कूलों में भेज देना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए, आदेश दिया कि 7 जून 2024 और 25 जून 2024 को NCPCR द्वारा जारी की गई सिफारिश पर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसको लेकर राज्य सरकारों द्वारा दिए गए आदेश भी स्थगित होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद को उत्तर प्रदेश और त्रिपुरा के अलावा अन्य राज्यों को भी अपनी याचिका में पक्षकार बनाने की अनुमति दी।

NCPCR के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने कुछ समय पहले कहा था

मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, NCPCR के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने कुछ समय पहले कहा था कि उन्होंने मदरसों को बंद करने के लिए कभी नहीं कहा। प्रियांक कानूनगो ने कहा था कि उन्होंने मदरसों को सरकार की ओर से दी जाने वाली धनराशि पर रोक लगाने की सिफारिश की, क्योंकि ये संस्थान गरीब मुस्लिम बच्चों को शिक्षा से वंचित करने का काम कर रहे हैं। प्रियांक कानूनगो ने कहा था कि मदरसे गरीब मुस्लिम बच्चों को अक्सर धर्मनिरपेक्ष शिक्षा के बजाय धार्मिक शिक्षा हासिल करने के लिए दवाब डालते हैं। उन्होंने कहा था कि देश में सभी बच्चों को शिक्षा का समान अवसर मिलना चाहिए।

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