नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। सुप्रीम कोर्ट की ओर से सद्गुरू जग्गी वासुदेव के ईशा फाउंडेशन को राहत मिली है। SC हाईकोर्ट में चल रही एक कार्यवाही को बंद करने का आदेश दिया है। इसमें एक पिता ने आरोप लगाया था कि उनकी दो बेटियों को जबरन उनके आश्रम में रखा गया है। उनका ब्रेनवॉश किया गया है।
CJI की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले में क्या कहा
चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि दोनों बेटियां गीता और लता अपनी मर्जी से आश्रम में रह रही हैं। ब्रेनवॉश के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मद्रास हाई कोर्ट ने इस मामले में गलत तरीके से हस्तक्षेप किया। पुलिस को आश्रम की जांच देने के आदेश को भी अनुचित बताया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फाउंडेशन के खिलाफ जो शिकायत है उसकी जांच राज्य की पुलिस करती रहेगी। कोर्ट का आदेश पुलिस की जांच में रुकावट नहीं बनेगा।
दोनों लड़कियां अपनी मर्जी से आश्रम में रह रही हैं
ईशा फाउंडेशन के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि तमिलनाडु पुलिस की रिपोर्ट में भी यह स्पष्ट किया गया है कि दोनों लड़कियां अपनी इच्छा से आश्रम में रह रही हैं।
मद्रास हाईकोर्ट ने 30 सितंबर को मामले में जांच करने के लिए कहा था
मद्रास हाईकोर्ट ने 30 सितंबर को मामले के खिलाफ जांच करने और फाउंडेशन से जुड़े सभी क्रिमिनल केसों की डिटेल पेश करने का आदेश दिया था। इसके बाद 1 अक्टूबर को पुलिसकर्मी फाउंडेशन के मुख्यालय में गए थे।
साल 2021 में दर्ज हुआ था केस
इससे पहले साल 2021 में योगा कोर्स के दौरान अपने साथ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी। इसका उल्लेख भी इस याचिका में किया गया है।




