नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है, जिससे राज्य की सियासत में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही चर्चाओं ने फिर रफ्तार पकड़ ली है। शिवकुमार ने कहा, “हम सब कुर्सी के लिए लड़ रहे हैं। यहां कई कुर्सियां खाली रखी हैं, आइए और बैठ जाइए। लेकिन कुर्सी मिलना बहुत मुश्किल है। जब मिल जाए, तो बैठ जाना चाहिए।” उन्होंने यह बयान बेंगलुरु सिटी सिविल कोर्ट में आयोजित केम्पेगौड़ा जयंती समारोह में दिया, जिसे बेंगलुरु बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित किया गया था।
शिवकुमार का यह बयान एक बार फिर यह संकेत देता है कि वह मुख्यमंत्री पद की ओर अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को छुपा नहीं रहे हैं। ऐसे समय में जब राज्य में नेतृत्व को लेकर अटकलें चल रही हैं, उनका यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
सीएम पद को लेकर कांग्रेस में जारी है अंदरूनी खींचतान
डीके शिवकुमार की “कुर्सी” वाली हालिया टिप्पणी ने एक बार फिर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम शिवकुमार के बीच सत्ता संघर्ष की अटकलों को हवा दे दी है। हालांकि, सिद्धारमैया पहले ही यह साफ कर चुके हैं कि सरकार में किसी भी प्रकार का नेतृत्व परिवर्तन नहीं होने जा रहा है। इसके बावजूद, शिवकुमार के बार-बार आने वाले बयानों से यह संकेत मिलता है कि कांग्रेस के भीतर सीएम पद को लेकर मंथन और अंतर्कलह अब भी खत्म नहीं हुई है।
“मैं ही रहूंगा मुख्यमंत्री, कोई बदलाव नहीं होगा”
सिद्धारमैया ने बीते गुरुवार को एक बार फिर साफ किया कि कांग्रेस सरकार अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करेगी और उस दौरान मुख्यमंत्री पद पर कोई बदलाव नहीं होगा, मैं ही मुख्यमंत्री रहूंगा। उन्होंने कहा, “यह कांग्रेस हाईकमान का निर्णय है और इसमें कोई फेरबदल नहीं किया जाएगा।” यह बयान ऐसे समय आया है जब पार्टी के भीतर गुटबाजी और नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं तेज हो रही थीं। सिद्धारमैया की बातों से साफ संकेत मिलता है कि कांग्रेस आलाकमान फिलहाल नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में नहीं है।
सूत्रों के मुताबिक, सिद्धारमैया ने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई है और यही उनका अंतिम जवाब है। उन्होंने डीके शिवकुमार का हवाला देते हुए कहा, “खुद शिवकुमार ने भी माना है कि मुख्यमंत्री पद खाली नहीं है।” साथ ही, दोनों नेताओं ने दोहराया कि यदि भविष्य में कोई निर्णय लेना है तो वह कांग्रेस हाईकमान द्वारा लिया जाएगा और वे उसका पूरी तरह पालन करेंगे।





