नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क । गोवा के श्रीगांव में लैराई देवी की जात्रा के दौरान भगदड़ मचने से 6 लोगों के मारे जाने की खबर है। जबकि, कम से कम 80 लोग घायल हो गए। हादसे में मौतों का आंकड़ा बढ़ भी सकता है। लेकिन फिलहाल, हादसे में घायल लोगों को गोवा मेडिकल कॉलेज (GMC) और मापुसा के नॉर्थ गोवा डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। बतो दें कि, गोवा के श्रीगांव में शुक्रवार रात को लैराई देवी की पारंपरिक जात्रा के दौरान भारी भीड़ के चलते भगदड़ मच गई। इस दुखद घटना में अब तक 6 लोगों के मारे जाने की जानकारी सामने आई है। जबकि, लगभग 80 से ज्यादा लोग घायल हुए है। हादसा बड़ा दर्दनाक तरीके से हुआ है। मारने वालों की संख्या बढ़ भी सकती है।
कैसे हुआ हादसा?
गोवा के श्रीगांव में हर साल की तरह इस साल भी पारंपरिक जात्रा का आयोजन किया था। जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। देर रात में भीड़ की संख्या में इजाफा देखा गया। भारी भीड़ के चलते जात्रा में देखते ही देखते भगदड़ मच गई। इस अफरा-तफरी में लोग अपने आप को संभालते रहे लेकिन, भीड़ इतनी ज्यादा थी कि कुछ लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला, और हादसे में 6 लोगों की जान चली गई। 80 से ज्यादा घायल हुए है।
प्रशासन की तैयारी और प्रतिक्रिया
इस दर्दनाक हादसे में प्रशासन ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। प्रशासन ने कहा कि, भीड़भाड़ को देखते हुए पहले से ही सुरक्षा में 1,000 पुलिसकर्मी को तैनात किया था, ड्रोन से भीड़ की निगरानी हो रही थी। लेकिन भारी भीड़ के चलते भगदड़ मच गई। फिलहाल घटना की जांच की जा रही है, और प्रशासन की ओर से कहा गया कि ,आगे से इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
सीएम प्रमोद सावंत ने दिए सख्त निर्देश
सीएम प्रमोद सावंत, समेत कई स्थानीय नेता भी दिन के समय जात्रा में मौजूद थे। हादसे की खबर मिलते ही सीएम सावंत खुद घटनास्थल पर पहुंचे, और हालातों का जायजा लिया। सीएम अस्पताल पहुंच कर हादसे में घायल हुए लोगों से मिले और हालचाल जाना। उन्होंने सभी घायलों को बेहतर इलाज देने के निर्देश भी दिए।
क्यों खास होती है लैराई देवी की जात्रा?
गोवा में आयोजित लैराई देवी आस्था का बहुत बड़ा केंद्र हैं। इस उत्सव में धोंड कहे जाने वाले श्रद्धालु जलते अंगारों पर नंगे पैर चलते हैं। यह अनुष्ठान श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतिक माना जाता है। ढोल-नगाड़ों, मंत्रोच्चार और शोभायात्रा के साथ यह रात भर चलने वाला आयोजन है, जिसमें आसपास के गांवों से हजारों लोग शामिल होते हैं। सुबह होते-होते, अंगारों पर चलने की यह परंपरा पूरी होती है और लोग देवी का आशीर्वाद लेकर घर लौटते हैं।





