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कोरोना संकट में जरूरतमंदों के लिए फरिश्ता बनीं सामाजिक संस्थाएं

कोलकाता, 27 मई (हि.स.)। कोरोना संकट के समय सामाजिक संस्थाएं जरूरतमंदों के लिए फरिश्ता बनकर काम कर रही हैं। इसी कड़ी में ‘द बंगाल’ नामक सामाजिक संस्था ने भी इस संकट में पीड़ित लोगों की सहायता करने का निर्णय लिया है। इस सराहनीय कदम के पीछे समाज के कुछ ऐसे विशिष्ट लोगों का हाथ है, जिन्होंने अपनी सोच से इस महामारी का मुकाबला करने के लिए सबसे अनोखे तरीके को ढूंढ निकाला है। ‘द बंगाल’ ने प्रभा खेतान फाउंडेशन के साथ मिलकर ‘राहत’ नामक एक पहल शुरू की है। इस पहल के तहत एक अनुदान अभियान चलाया है। संस्था लोगों से आर्थिक राशि के बदले विभिन्न तरह की यह सेवाएं जैसे- कोरोना के इलाज में उपयोगी दवाएं, ऑक्सीमीटर, मेडिकल ऑक्सीजन सिेंलिंडल, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, अस्पताल में बेड डोनेट करना या फिर किसी भी अन्य तरीके से सहयोग देने की अपील की है। संस्था ‘द बंगाल’ मौजूदा समय में कोविड राहत सामग्री का एक बैंक बनता रहा है। इस बैंक से पीड़ितों को जल्द मदद मिल सकेगा। अगर कोई नगद देकर मदद करना चाहता है तो ‘द बंगाल’ संस्था के लोग उससे संपर्क कर कोविड राहत सामग्रियों की खरीदारी के लिए वेंडरों से बात करा सकता है। इस व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है। पहले ही ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, ऑक्सीमीटर, दवाएं, अस्पतालों में बेड का दान करने जैसी कई एनजीओ/सेफ होम काम कर रही हैं। ‘द बंगाल’ की तरफ से ईशा दत्ता, नीलांजना सेनगुप्ता और स्वरूप दत्ता इस परियोजना का दायित्व संभाल रही हैं। ईशा का कहना है कि मुसीबत की इस कठिन घड़ी में राज्यभर में फ्रंटलाइन वर्कर अपने संबंधित क्षेत्र में अपने तरीके से सेवाएं दे रहे हैं। ‘द बंगाल’ भी इस नेक काम के लिए आगे आया है। नीलांजना सेनगुप्ता के अनुसार ‘द बंगाल’ से जुड़कर उन्हें गर्व की अनुभूति हो रही है। यह संस्था महामारी के दौरान लोगों की हर तरह से मदद के लिए तत्पर रहती है। ‘द बंगाल’ के सदस्य एवं अधिकारी इसके लिए हमेशा से एकजुट होकर नि:स्वार्थ भाव से सेवाकार्य करते रहते हैं। मनीषा रामपुरिया नामक एक दानदाता का कहना है कि समाज में चारों ओर की मौजूदा स्थिति को देखकर उनका मन काफी दुखी रहता हैं। उनका यह निजी मानना है कि यह समय उनके लिए बेहतर मौका है, जब आगे आकर जो बन पड़े वह मदद कर रही है। उनका कहना है कि जरूरी नहीं कि मदद बड़े पैमाने पर ही किया जाये, अपने सामर्थ के मुताबिक हर छोटी मदद मायने रखती है। द बंगाल के कार्यवाहक अध्यक्ष एवं फिल्मकार गौतम घोष कहते हैं कि प्लेग नामक महामारी के दौर में भी इसी तरह से सिस्टर निवेदिता, रवींद्रनाथ टैगोर व कई अन्य समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तित्व के लोग आगे आये थे और समाज के असहाय लोगों के प्रति मदद का हाथ बढ़ाया था। संस्था के मानद सचिव संदीप भुतोड़िया का कहना हैं कि कोरोना महामारी इन दिनों लोगों के उपर रोजाना नयी मुसीबतें ढा रही है, ऐसे में लोग खुद को काफी असहाय महसूस कर रहे हैं। ऑक्सीजन सिलिंडरों और हॉस्पिटल में बेड की कमी ने यह खतरा और बढ़ा दिया है। यह वह समय है जब मानवता को फिर से एकजुट होने की जरूरत है। द बंगाल का इरादा कोरोना का कड़े तरीके से मुकाबला करना है। हम अनुदान ले रहे हैं ताकि इस वायरस से पीड़ित एवं इस कठिन घड़ी में समाज में आर्थिक रुप से कमजोर लोगों के बीच यह मदद पहुंचाया जा सके। हिन्दुस्थान समाचार / ओम प्रकाश

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