नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला 18 दिन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर बिताने के बाद धरती पर सुरक्षित लौट आए हैं। उनका स्पेसएक्स ड्रैगन कैप्सूल कैलिफोर्निया के पास प्रशांत महासागर में लैंड हुआ। अंतरिक्ष में उन्होंने करीब 1.3 करोड़ किलोमीटर की यात्रा की और 300 से ज्यादा बार सूर्योदय-सूर्यास्त देखा।
क्या मिलेगा सबसे पहले खाने-पीने को?
स्पेस से लौटते ही किसी भी अंतरिक्ष यात्री को तुरंत भारी खाना नहीं दिया जाता। NASA का प्रोटोकॉल कहता है कि पहले यात्रियों को इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक या ORS जैसा घोल दिया जाता है, ताकि शरीर का ब्लड प्रेशर स्थिर रहे। इसके बाद जूस, सूप और नरम ब्रेड दी जाती है। अगर यात्री ठीक महसूस कर रहे हों, तो केला, सेब जैसे फल भी मिलते हैं। सामान्य भोजन करीब 24 घंटे बाद ही दिया जाता है।
NASA का मेडिकल और रिकवरी प्रोसेस क्या होता है?
लैंडिंग के बाद कैप्सूल को साफ किया जाता है। करीब 45 मिनट से 1 घंटे में अंतरिक्ष यात्रियों को बाहर निकाला जाता है। उन्हें तुरंत मेडिकल टीम द्वारा ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट, ऑक्सीजन लेवल की जांच के लिए लिया जाता है। फिर हेलीकॉप्टर से उन्हें मेडिकल सेंटर ले जाया जाता है। यहां वो कम से कम 7 दिन रिहेबिलिटेशन (पुनर्वास) में बिताते हैं ताकि शरीर दोबारा पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण के अनुकूल ढल सके।
रूस में क्यों दिया जाता है ब्रेड और नमक?
रूस में परंपरा है कि जब कोई अंतरिक्ष यात्री स्पेस से लौटता है, तो उसका स्वागत ब्रेड और नमक से किया जाता है। ब्रेड को जीवन का आधार माना जाता है। नमक को शुद्धता और अच्छे स्वास्थ्य का प्रतीक। ये परंपरा 1960 के दशक में यूरी गागरिन के लौटने के बाद शुरू हुई। अब भी यह प्रतीकात्मक तौर पर निभाई जाती है, खासकर रूस के स्टार सिटी में।
शुभांशु शुक्ला ने किए 7 खास प्रयोग
स्पेस मिशन के दौरान शुभांशु ने कुल 7 महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोग किए, जिनमें शामिल हैं मेथी और मूंग के बीज का अंकुरण माइक्रोएल्गी और सायनोबैक्टीरिया भारतीय टार्डिग्रेड और मायोजेनेसिस फसल बीज और एक खास वॉयाजर डिस्प्ले प्रयोग उन्होंने स्पेस में 310 से ज्यादा बार पृथ्वी की परिक्रमा की। न केवल गर्व, बल्कि विज्ञान की बड़ी छलांग शुभांशु शुक्ला की वापसी केवल एक सफल मिशन की वापसी नहीं है, बल्कि यह भारत के लिए गौरव और विज्ञान में प्रगति की मिसाल है। उनके प्रयोगों का असर भविष्य की स्पेस फॉर्मिंग और खाद्य उत्पादन पर भी पड़ सकता है। NASA की मेडिकल सतर्कता और रूसी परंपरा की तुलना एक रोचक अंतर्दृष्टि देती है कि कैसे विज्ञान और संस्कृति दोनों स्पेस मिशन में भूमिका निभाते हैं।





