नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । सीएपीएफ जवानों के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था बता रहा है। दरअसल, गृह मंत्रालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों से पता चला है कि लंबी शिफ्ट और बार-बार नींद की कमी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) कर्मियों पर भारी पड़ रही है। आँकड़े इस समस्या की गंभीरता को दर्शाते हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि हाल के वर्षों में 730 सैनिकों ने अपनी जान दी है, जबकि 55,000 से अधिक सैनिक इस्तीफा दे कर घर वापिस हो लिए हैं या उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली है।
छुट्टी से लौटने के बाद 80 प्रतिशत आत्महत्याएं
सैनिकों द्वारा आत्महत्या के कारणों का अध्ययन करने के लिए गठित एक टास्क फोर्स के अनुसार, 80 प्रतिशत से अधिक आत्महत्याएँ सैनिकों के छुट्टी से लौटने के बाद होती हैं। गृह मंत्रालय द्वारा साझा की गई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि आत्महत्या के मुख्य कारण जीवनसाथी या परिवार के सदस्य की मृत्यु, वैवाहिक कलह, तलाक, वित्तीय कठिनाइयाँ और बच्चों की परवरिश की चिंताएँ हैं।
समस्या से निपटने के लिए उठाए गए कदम
गृह मंत्रालय ने यह भी बताया कि इस समस्या से निपटने के लिए उसने क्या कदम उठाए या वह उठाने जा रहा है। अभी गृह मंत्रालय ने सीएपीएफ कर्मचारियों के लिए परिवार के साथ बिताए समय को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में कहा कि इस साल अक्टूबर तक 6,302 कर्मचारियों ने अपने परिवार के साथ 100 दिन बिताए हैं। मंत्रालय ने 100 दिन की छुट्टी नीति के साथ सैनिकों को तनाव मुक्त रखने की पहल की है।
सैनिकों के मानसिक स्वास्थ्य में सुधार के सुझाव
अध्ययन के लिए गठित टास्क फोर्स ने सैनिकों के मानसिक स्वास्थ्य में सुधार के लिए कई उपाय भी सुझाए। इनमें अधिकारियों और सैनिकों के बीच अधिक नियमित बातचीत, बेहतर आराम के लिए ड्यूटी घंटों का उचित वितरण और मनोरंजक सुविधाओं का प्रावधान शामिल है। इसके अलावा रहन-सहन की स्थिति में सुधार के लिए भी सुझाव दिए गए हैं। रिपोर्ट में काम के दबाव को आत्महत्या का कारण बताया गया है, लेकिन पारिवारिक समस्याओं को मुख्य कारण बताया गया है। रिपोर्ट में महिला कर्मचारियों में आत्महत्या की कम दर का भी जिक्र किया गया है। इस रिपोर्ट से यह भी यह पता चलता है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में तनाव सहन करने की शक्ति अधिक है और वह अधिक तनाव होने पर भी अपने को स्वयं से समझाने में सफल हैं।




