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Monday, March 30, 2026
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राहुल गांधी के कार्यक्रम में अपमान से नाराज शशि थरूर, दिल्ली में केरल कांग्रेस की चुनावी बैठक से बनाई दूरी

केरल से कांग्रेस सांसद शशि थरूर और पार्टी लीडरशिप के बीच जारी अनबन लगता है अभी तक पूरी तरह से खत्‍म नहीं हुई है।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। कांग्रेस सांसद शशि थरूर और पार्टी नेतृत्व के बीच चल रही खटास एक बार फिर चर्चा में है। केरल विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस हाईकमान की ओर से 23 जनवरी 2026 को दिल्ली में बुलाई गई अहम बैठक से शशि थरूर ने दूरी बना ली है। उनकी गैरहाजिरी ने पार्टी के अंदरूनी मतभेदों को फिर से उजागर कर दिया है।

बैठक से क्यों दूर रहे शशि थरूर?

सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में राहुल गांधी के कोच्चि दौरे के दौरान शशि थरूर को अपेक्षित सम्मान और मंच नहीं मिला, जिससे वे नाराज़ बताए जा रहे हैं। इसी नाराज़गी के चलते उन्होंने केरल कांग्रेस की चुनावी तैयारी से जुड़ी इस अहम बैठक में शामिल न होने का फैसला किया है। हालांकि, शशि थरूर के कार्यालय की ओर से इस पर सफाई भी दी गई है। उनके दफ्तर ने कहा कि थरूर केरल लिटरेचर फेस्टिवल में हिस्सा लेने के लिए कालीकट में हैं, जहां वे श्री नारायण गुरु पर आधारित अपनी नई किताब पर बोल रहे हैं। पार्टी को इसकी जानकारी पहले ही दे दी गई थी।

कांग्रेस में बढ़ती अंदरूनी कलह

कांग्रेस में पिछले कुछ समय से अंदरूनी मतभेद सामने आते रहे हैं और शशि थरूर कई बार इन चर्चाओं के केंद्र में रहे हैं। उनके कुछ बयान और सोशल मीडिया पोस्ट पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग माने गए, जिससे नेतृत्व असहज दिखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार के कुछ कदमों की सराहना को लेकर भी थरूर पार्टी के भीतर आलोचना का सामना कर चुके हैं। इसके अलावा सुरक्षा और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर उनकी टिप्पणियों को भी अलग नजरिए के तौर पर देखा गया है।

केरल चुनाव से पहले कांग्रेस की बढ़ी चिंता

हाल ही में गौतम गंभीर के साथ शशि थरूर की एक सोशल मीडिया पोस्ट पर भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधा। भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस के भीतर मतभेद अब खुले तौर पर दिखने लगे हैं और इससे पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। केरल विधानसभा चुनाव से पहले यह स्थिति कांग्रेस के लिए चुनौती बन सकती है। शशि थरूर राज्य में एक लोकप्रिय नेता माने जाते हैं, खासकर शहरी और युवा वर्ग में उनकी अच्छी पकड़ है। ऐसे में उनकी नाराज़गी और अहम बैठकों से दूरी पार्टी की चुनावी रणनीति को कमजोर कर सकती है।

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