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Sunday, March 29, 2026
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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का यूटर्न! पहले कहा गिरफ्तारी के लिए तैयार, अब हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने यौन उत्पीड़न मामले में पहले गिरफ्तारी के लिए तैयार रहने के बाद अब इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा दर्ज कराए गए यौन उत्पीड़न मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया है। पहले उन्होंने कहा था कि वे गिरफ्तारी के लिए तैयार हैं, लेकिन अब उन्होंने अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है। याचिका उनके अधिवक्ता राजर्षि गुप्ता, सुधांशु कुमार और श्री प्रकाश के जरिए दायर की गई है। कोर्ट ने याचिका पर जल्द सुनवाई करने की संभावना जताई है।

दो-तीन अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज

दरअसल, मामला झूंसी थाना क्षेत्र से जुड़ा है। तुलसी पीठाधीश्वर के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने धारा 173(4) के तहत जिला कोर्ट में आवेदन दिया था। इसके बाद एडीजे रेप एंड पॉक्सो स्पेशल कोर्ट विनोद कुमार चौरसिया ने पुलिस को आदेश दिया कि वे मुकदमा दर्ज करें और विवेचना करें। आदेश के अनुपालन में पुलिस ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी और दो-तीन अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।

मामले की विवेचना भी शुरू

पुलिस ने एफआईआर में भारतीय दंड संहिता की धारा 351(3), लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO) की धारा 5, 6, 3, 4(2), 16 और 17 के तहत मामला दर्ज किया। साथ ही मामले की विवेचना भी शुरू कर दी गई है।

अग्रिम जमानत याचिका दाखिल का विवाद

इस घटनाक्रम ने सनातन समाज और धार्मिक समुदाय में हलचल मचा दी है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के पहले गिरफ्तारी के लिए तैयार होने और अब अग्रिम जमानत याचिका दाखिल करने के कदम ने विवाद को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाईकोर्ट की सुनवाई और पुलिस जांच दोनों ही मामलों में सच्चाई सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है

इस मामले में कई राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक गुरु के खिलाफ अगर आरोप हैं तो कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। अदालत और पुलिस दोनों को निष्पक्ष रहकर कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि समाज में न्याय और कानून का सही संदेश जा सके।

मामला अभी लंबी कानूनी लड़ाई में है

सामाजिक रूप से यह मामला धार्मिक संस्थानों की जवाबदेही, अनुशासन और अनुयायियों की सुरक्षा की दिशा में भी अहम संकेत देता है। अविमुक्तेश्वरानंद का यह कदम कि उन्होंने अब जमानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया है, यह दर्शाता है कि मामला अभी लंबी कानूनी लड़ाई में है।

पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू कर दी है

पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू कर दी है और अब तक एफआईआर के आधार पर सभी संबंधित पक्षों से बयान लिए जा रहे हैं। हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका के दायर होने के बाद केस की सुनवाई जल्द होने की संभावना है। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह मामला न केवल कानूनी दृष्टि से बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी सुनवाई और निष्पक्ष निर्णय की मांग करता है।

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