नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। पंजाब के शंभू और खनौरी बॉर्डर पर 13 महीने से डेरा डाले किसानों को बुधवार 20 मार्च देर रात हटा दिया गया। पुलिस ने धरना स्थल पर लगे टेंट और मंचों को बुलडोजर से तोड़ दिया। कई किसान नेताओं को हिरासत में लिया गया, जिनमें सरवन सिंह पंधेर और जगजीत सिंह डल्लेवाल भी शामिल हैं।
कैसे हुई पुलिस कार्रवाई?
बॉर्डर पर किसी भी तरह की हिंसा रोकने के लिए तीन हजार से ज्यादा पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। जब मोहाली में किसान नेताओं को हिरासत में लिया गया, तब पुलिस और किसानों के बीच झड़प भी हुई। हालात को देखते हुए कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं।
मीटिंग से एक्शन तक की पूरी टाइमलाइन
सुबह 11 बजे किसान नेताओं और केंद्र सरकार के प्रतिनिधिमंडल की चंडीगढ़ में बैठक हुई। दोपहर 3 बजे बैठक खत्म हुई, किसान नेताओं ने प्रेस को जानकारी दी। शाम 4 बजे किसान नेता चंडीगढ़ से शंभू बॉर्डर के लिए रवाना हुए। शाम 5 बजे पुलिस ने रास्ते में किसान नेताओं को हिरासत में लिया। शाम 6 बजे शंभू बॉर्डर पर मौजूद किसानों को हटाने की चेतावनी दी गई। शाम 7 बजे बुलडोजर से टेंट हटाने की कार्रवाई शुरू हुई। कब खुलेगा रास्ता? पुलिस ने दी जानकारी पटियाला के एसएसपी नानक सिंह ने बताया कि प्रदर्शन स्थल को पूरी तरह खाली करा लिया गया है। ट्रॉलियां और अन्य वाहन भी हटा दिए गए हैं। अब हरियाणा सरकार तय करेगी कि कब रास्ता खोला जाएगा।
किसान नेताओं की गिरफ्तारी पर भड़के किसान
भारतीय किसान यूनियन भाकियू के नेता बचित्तर सिंह कोटला ने कहा कि पंजाब सरकार ने किसानों के साथ विश्वासघात किया है। अमृतसर-दिल्ली हाईवे पर भी किसानों ने प्रदर्शन किया, जिससे कुछ देर के लिए ट्रैफिक बाधित हुआ। चरणजीत सिंह चन्नी पूर्व मुख्यमंत्री, कांग्रेस “यह किसानों पर सोची-समझी साजिश के तहत हमला है। केंद्र सरकार ने बातचीत की बात की और फिर किसानों को धोखा दिया। रवनीत सिंह बिट्टू केंद्रीय मंत्री, बीजेपी “भगवंत मान सरकार किसानों और केंद्र के बीच बातचीत को विफल करने की कोशिश कर रही है।
पंजाब सरकार का क्या है पक्ष?
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि लंबे समय से बंद हाईवे के कारण कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहा था। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे पंजाब के विकास को रोकने के बजाय केंद्र के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखें। केंद्र सरकार और किसानों के बीच बुधवार 19 मार्च को सातवीं बैठक भी बेनतीजा रही। हालांकि, सरकार ने कहा कि बातचीत सकारात्मक थी और अगली बैठक 4 मई को होगी। लेकिन किसान नेताओं की गिरफ्तारी से हालात और बिगड़ सकते हैं। किसान नेताओं ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में वे अपने आंदोलन को और उग्र कर सकते हैं। अब देखना होगा कि पंजाब और केंद्र सरकार इस पर क्या रुख अपनाती हैं।





