नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । भारत के चार राज्यों में बच्चों में ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (HMPV) संक्रमण के सात मामले सामने आए, जिनमें बेंगलुरु, नागपुर, तमिलनाडु और अहमदाबाद शामिल हैं। यह मामले चीन में सांस से जुड़ी बीमारियों में उछाल के बीच आये हैं। हालांकि, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने देश की जनता को आश्वस्त किया है कि स्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 जैसे प्रकोप का कोई खतरा नहीं है। नड्डा ने कहा कि HMPV कोई नया वायरस नहीं है। इसकी पहली बार पहचान 2001 में हुई थी और यह कई वर्षों से पूरी दुनिया में फैल रहा है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय, ICMR और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र चीन के साथ-साथ पड़ोसी देशों में स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को सभी राज्य स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ एक वीडियो कॉन्फ्रेंस की और स्पष्ट किया कि एचएमपीवी वायरस स्थिर बना हुआ है और यह घबराने वाली चिंता का कारण नहीं है। एचएमपीवी की रोकथाम किसी भी अन्य श्वसन संक्रमण की तरह ही है जैसे कि छींकते व खांसते समय अपना मुंह और नाक ढकना, हाथ धोना, भीड़-भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनना और ज़रूरत पड़ने पर स्वास्थ्य सुविधा को रिपोर्ट करना।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने बेंगलुरु में दो मामलों की पुष्टि की है। यहां तीन महीने की बच्ची का परीक्षण पॉजिटिव आया था। बच्ची दिसंबर में बुखार और सर्दी के साथ भर्ती थी। हालांकि अब वह ठीक हो गई है। इसके अलावा एक अन्य मामले में आठ महीने का एक लड़का शामिल था, जो बुखार और मामूली चोट के साथ अस्पताल में भर्ती हुआ, जिसका HMPV और रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस (RSV) दोनों के लिए परीक्षण पॉजीटिव आया था। लेकिन अब वह बेहतर स्थिति में है। इसके अलावा अहमदाबाद और राजस्थान के डूंगरपुर के दो महीने के बच्चे में एचएमपीवी के सकारात्मक लक्षण मिले थे। जिनका उपचार किया गया और अब उसे भी छुट्टी दे दी गई।
नागपुर में सात वर्षीय और तेरह वर्षीय बच्चे से जुड़े दो केस सामने आए। परीक्षणों में एचएमपीवी की पुष्टि हुई। हालांकि दोनों बच्चे देखभाल के माध्यम से ठीक हो गए। वहीं, तमिलनाडु में स्वास्थ्य सचिव सुप्रिया साहू ने चेन्नई और सलेम में दो सक्रिय मामलों की पुष्टि की। उन्होंने जनता को आश्वस्त किया कि दोनों बच्चे स्थिर स्थिति में हैं, उन्होंने कहा कि एचएमपीवी संक्रमण स्व-सीमित है और पर्याप्त जलयोजन और आराम सहित लक्षणात्मक देखभाल से ठीक हो जाता है।
2001 में हुई थी वायरस की पहचान
कंसल्टेंट फिजिशियन और महामारी विज्ञानी डॉ. चंद्रकांत लहरिया ने कहा कि इस एचएमपीवी वायरस की पहचान सबसे पहले 2001 में हुई थी। यह मानने का कोई कारण नहीं है कि एचएमपीवी एक खतरनाक वायरस है। उन्होंने बताया कि एचएमपीवी वायरस इन्फ्लूएंजा जैसा ही है। ज़्यादातर बच्चों को यह संक्रमण होता है और फिर उनमें वायरस के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है। यह वायरस बिना लक्षण वाला होता है, खास तौर पर वयस्कों में। उन्होंने कहा कि चिंता सिर्फ़ इस बात की होगी कि क्या कोई नया म्यूटेशन होता है, लेकिन अभी तक कोई म्यूटेशन नहीं हुआ है।





