नई दिल्ली। ”कहते हैं कि तथ्य अपरिवर्तनीय होते हैं, लेकिन व्याख्याओं में भिन्नता हो सकती है। जहां तक भारत के स्वाधीनता संग्राम के इतिहास की बात है, तो तथ्यों में भिन्नता है, जबकि व्याख्याएं अपरिवर्तनीय हैं। यही कारण है कि आज हमें कड़ियों को जोड़ना पड़ रहा है। कड़ियों को क्लिक »-www.prabhasakshi.com




