नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में बैसरन घाटी में हुए हमले की न्यायिक जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका खारिज कर दी गई है। सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका पर सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को फटकार लगाते हुए कहा कि ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे सेना का मनोबल गिरे। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसी याचिका दायर करने से पहले अच्छी तरह सोच लेना चाहिए।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि ऐसी याचिका दायर करने से पहले जिम्मेदारी से काम करना चाहिए। देश के प्रति हर किसी का कर्तव्य है। यह समय प्रत्येक भारतीय नागरिक के लिए आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने का है। ऐसी कोई याचिका न दायर करें जिससे भारतीय नागरिकों या सेना का मनोबल गिरे। इस मामले की संवेदनशीलता देखिए।
वकीलों के एक ग्रुप फतेह कुमार शाहू, मोहम्मद जुनैद और विक्की कुमार ने पहलगाम हमले की न्यायिक जांच की मांग करते हुए एक याचिका दायर की थी। याचिका खारिज करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं का पक्ष सुना। कुछ प्रश्न भी पूछे। न्यायालय में न्यायाधीश विवादों को सुलझाने का निर्णय लेते हैं। पीठ ने यह भी कहा कि जांच करना हमारा काम नहीं है।
याचिका में यह भी मांग की गई कि जम्मू-कश्मीर से बाहर पढ़ रहे कश्मीरी छात्रों को सुरक्षा प्रदान की जाए। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि पहलगाम पर हमले के बाद कश्मीरी छात्रों पर हमले हो रहे हैं। इस मांग पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा, “क्या आप जो अनुरोध कर रहे हैं उसके बारे में आप आश्वस्त हैं?” आप पहले सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के माध्यम से जांच की मांग करें। जब हमने उनसे कहा कि वे जांच नहीं कर सकते, तो आप प्रेस काउंसिल को निर्देश देने और मुआवजे की मांग कर रहे हैं और अब आप छात्रों के बारे में बात कर रहे हैं।
पीठ ने याचिकाकर्ताओं को याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी। इसके अलावा, यदि जम्मू-कश्मीर के छात्रों को कोई समस्या आ रही है तो उन्हें संबंधित उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने का निर्देश दिया गया।





