नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। केंद्र सरकार ने देशभर में जातीय जनगणना कराने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। इस पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि यह निर्णय एक दिन में नहीं बल्कि पिछले 11 साल की नीति और सोच का नतीजा है।
‘प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिबद्धता का प्रमाण’
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि यह पहली बार है जब आजादी के बाद किसी केंद्र सरकार ने जातिगत जनगणना को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस सोच को दिखाता है जिसमें वे वंचितों और पिछड़े वर्गों को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
‘OBC आयोग को दिया गया संवैधानिक दर्जा’
उन्होंने बताया कि ओबीसी कमीशन को संवैधानिक दर्जा देना भी इसी दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। भाजपा सरकार की नीति हमेशा सामाजिक न्याय पर केंद्रित रही है।
राहुल गांधी पर सीधा हमला
जातीय जनगणना को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की टिप्पणियों पर धर्मेंद्र प्रधान ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी को सीरियस मत लो, उन्हें सर्वे और सेंसस का अंतर भी नहीं पता।” उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी राजनीतिक स्टंट कर रहे हैं और जनगणना जैसे गंभीर मुद्दे को भी हल्के में ले रहे हैं। प्रधान ने कांग्रेस और नेहरू परिवार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पंडित नेहरू जातीय आरक्षण के खिलाफ थे और उन्होंने इसके खिलाफ राज्यों को चिट्ठियां लिखी थीं। उन्होंने यह भी कहा कि मंडल कमीशन के समय भाजपा इसका समर्थन कर रही थी, लेकिन कांग्रेस ने उसे रोकने की कोशिश की थी।
‘जातीय जनगणना कुछ दलों के लिए राजनीतिक ATM बन गई थी’
धर्मेंद्र प्रधान ने कटाक्ष करते हुए कहा कि जातीय जनगणना कुछ दलों के लिए राजनीतिक एटीएम बन गई थी, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने डिजिटल पेमेंट सिस्टम लाकर इसे बंद कर दिया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में धर्मेंद्र प्रधान ने बिहार के जातीय सर्वे का भी हवाला दिया और कहा कि भाजपा ने वहां भी इसका समर्थन किया था। उन्होंने कर्पूरी ठाकुर को याद करते हुए कहा कि जनसंघ (भाजपा का पूर्व रूप) ने भी पिछड़े वर्गों के हक के लिए लड़ाई लड़ी थी।




