नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। देशभर में आवारा कुत्तों के हमलों के बढ़ते मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों की निष्क्रियता पर कड़ी नाराजगी जताई है। जिसपर अदालत ने कहा कि बच्चों पर लगातार हमले हो रहे हैं और इसके बावजूद अधिकांश राज्यों ने हलफनामा दाखिल नहीं किया, जिससे देश की अंतरराष्ट्रीय छवि प्रभावित हो रही है।
बता दें कि, सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को 3 नवंबर को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया है। हालांकि, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना के मुख्य सचिवों को छूट दी गई, क्योंकि उन्होंने समय पर हलफनामा दाखिल कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के पुणे और भंडारा में हालिया घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि, बच्चों पर हमलों के मामले बढ़ रहे हैं और एक जगह तो 20 कुत्तों के झुंड ने हमला किया।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगस्त में नोटिस जारी होने के बावजूद राज्यों ने हलफनामा दाखिल नहीं किया। इसके चलते सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को 3 नवंबर को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया गया है। पश्चिम बंगाल और तेलंगाना को इस बार छूट मिली है क्योंकि उन्होंने समय पर हलफनामा दाखिल कर दिया था। अदालत ने महाराष्ट्र के पुणे और भंडारा में हालिया हमलों का भी हवाला दिया, जहां बच्चों पर कुत्तों के झुंड ने हमला किया। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को निर्देश दिया है कि आवारा कुत्तों को पकड़कर नसबंदी और टीकाकरण कर उनके इलाके में वापस छोड़ा जाए, ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में जारी आदेश के अनुसार सभी राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों को निर्देश दिया था कि वे आवारा कुत्तों को पकड़कर नसबंदी और टीकाकरण के बाद उनके इलाके में वापस छोड़ें। अदालत की नाराजगी इस बात पर है कि इतने गंभीर मामले पर भी अधिकांश राज्य गंभीर नहीं हैं।
कोर्ट ने सख्त होते हुए कहा, दो महीने में बच्चों पर हमलों के कई मामले सामने आए हैं। यदि राज्य सरकारें गंभीर नहीं हुईं, तो देश की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट की यह नाराजगी यह दर्शाती है कि देश में आवारा कुत्तों की समस्या अब गंभीर रूप ले चुकी है और इसे नजरअंदाज करना महंगा साबित हो सकता है।




