नई दिल्ली रफ्तार डेस्क – देश आज लोह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वी जयंती मना रहा है जिन्होंने अनेकता में एकता के उदाहरण को जमीन पर उतारा है। जिस वक्त भारत 500 से ज्यादा रियासतों में बंटा हुआ था उस वक्त सरदार वल्लभभाई पटेल ने ही इन रियासतों को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। ऐसे ना जाने कितने ही देश हित में सरदार पटेल ने योगदान दिए जो कभी नहीं भुलाए जा सकते।
500 से ज्यादा रियासतों को एकजुट किया
साल 1947 में आजादी के तुरंत बाद अंग्रेजों ने इन रियासतों के सामने दो विकल्प रखें जिसमें वह यहां तो भारत या पाकिस्तान में शामिल हो सकते थे या इसके अलावा वह स्वतंत्र रहने का विकल्प चुन सकते थे। सरदार पटेल ने भांप लिया कि अगर इन विकल्पों में से किसी एक विकल्प को भी चुना गया तो यह भारत की एकता को खंडित कर सकता है। सरदार पटेल को लगता था कि अगर स्वतंत्र रहकर या पाकिस्तान के साथ गठबंधन करने पर किसी भी रियासत के द्वारा विचार किया गया तो देश में बड़े पैमाने पर बंटवारा शुरू हो जाएगा। हालांकि सरदार वल्लभभाई पटेल ने कूटनीति और दृढ़ संकल्प की ऐसी मिसाल पेश की की उन्होंने इन सभी रियासतों को भारतीय संघ में मिल लिया।
आजादी पूर्व और आजादी के बाद दिखाया दृढ़ संकल्प
सरदार वल्लभभाई पटेल ने आजादी से पूर्व साल 1930 में नमक मार्च में हिस्सा दिया और साल 1942 में अंग्रेजों के खिलाफ छेड़े गए भारत छोड़ो आंदोलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह पटेल और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों का ही समर्थ था कि सन 1947 में भारत आजाद हो गया। आजादी के बाद सामने आई चुनौतियों को भी सरदार पटेल ने गृहमंत्री के तौर पर दृढ़ संकल्प और मजबूत इच्छा शक्ति के साथ स्वीकारा। सरदार पटेल ने आजादी से पहले की चुनौतियों और बात की चुनौतियों के बीच ऐसा सामंजस्य स्थापित किया कि उन्हें भारत के लोह पुरुष के नाम से जाना जाने लगा।




