नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बीआर गवई पर सोमवार को एक वकील द्वारा जूता फेंकने की कोशिश ने पूरे देश में हलचल मचा दी है। न्यायपालिका के इतिहास में यह अपनी तरह की पहली घटना बताई जा रही है, जिसे बेहद गंभीर और निंदनीय माना जा रहा है। इस घटना ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। विपक्ष ने इस घटना के बहाने सत्ताधारी दल पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। शिवसेना (उद्धव गुट) के सांसद संजय राउत ने इस हमले की कोशिश पर कड़ी नाराजगी जताई है। वहीं, देशभर में संविधान और न्यायपालिका की गरिमा व सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है।
संजय राउत ने घटना को लेकर बीजेपी पर साधा निशाना
चीफ जस्टिस बीआर गवई पर जूता फेंकने की कोशिश के मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने इस घटना को लेकर बीजेपी नेतृत्व को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भूषण रामकृष्ण गवई कोई साधारण न्यायाधीश नहीं हैं, वे भारत के मुख्य न्यायाधीश हैं और एक संवैधानिक पद पर हैं। इसके बावजूद अगर कोई सरफिरा उन पर हमला करने की कोशिश करता है, तो यह बेहद गंभीर है।”
मीडिया को दिए एक बयान में संजय राउत ने सवाल उठाया कि इस घटना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह या RSS प्रमुख मोहन भागवत में से किसी ने भी एक शब्द क्यों नहीं कहा। उन्होंने इसे सत्ता में बैठे लोगों की संवेदनशीलता की कमी करार दिया। संजय राउत ने यह भी कहा कि यह हमला केवल किसी व्यक्ति विशेष पर नहीं, बल्कि हमारे संविधान और न्यायपालिका की गरिमा पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि सत्ता में वही लोग हैं जो संविधान को नहीं मानते और अब उनके चेले ऐसे दुस्साहस कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यह घटना न्यायपालिका के लिए खतरे की घंटी है और पूरे देश को इससे सबक लेना चाहिए।
बिहार चुनाव पर बोले संजय राउत
आगामी बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सांसद संजय राउत ने एक गंभीर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव और राहुल गांधी द्वारा चलाई गई वोट अधिकार यात्रा ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के सामने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। राउत ने आरोप लगाया कि कुछ लोग एक ही घर में 100 वोटर बना रहे हैं, जो लोकतंत्र के साथ सीधा खिलवाड़ है। उन्होंने चेतावनी दी कि मोदी सरकार अब 75 लाख महिलाओं के वोट खरीदने की कोशिश कर सकती है, जो लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए एक खतरनाक संकेत है। उनके अनुसार, सत्ता और चुनावी प्रक्रिया पर नियंत्रण रखने वाले लोग लगातार जनता के अधिकारों में हस्तक्षेप कर रहे हैं। संजय राउत ने कहा कि लोकतंत्र में संविधान और न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बनाए रखना हर राजनीतिक दल की जिम्मेदारी है।





