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Monday, March 2, 2026
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CJI गवई पर जूता फेंकने की कोशिश से मचा हड़कंप, तेजस्वी यादव बोले- यह हमारे लोकतंत्र की रीढ़ पर हमला है

सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंकने की घटना पर तेजस्वी यादव ने कड़ी निंदा की उन्होंने कहा कि यह संविधान और बाबा साहेब अंबेडकर की विचारधारा पर हमला है।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट में उस समय अफरातफरी मच गई जब मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई पर एक वकील ने जूता फेंकने की कोशिश की। यह घटना देश के न्यायिक इतिहास में पहली बार हुई है, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया है।

‘यह संविधान और अंबेडकर की विचारधारा पर हमला है’ – बोले तेजस्वी यादव

इस घटना पर बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि पूरे न्यायिक तंत्र और संविधान पर चोट है। तेजस्वी ने कहा,“जब देश के सर्वोच्च न्यायिक पद पर बैठे व्यक्ति को अदालत में ही अपमान का सामना करना पड़े, तो यह लोकतंत्र के लिए चिंता की बात है। यह वही माहौल है जो 2014 के बाद राजकीय संरक्षण में बनाया गया, जहां घृणा और हिंसा को सामान्य कर दिया गया है।

‘संवैधानिक पद भी अब सुरक्षित नहीं’

तेजस्वी यादव ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश दलित समुदाय से आते हैं और संविधान की भावना के अनुरूप काम करते हैं। अगर ऐसे व्यक्ति भी सुरक्षित नहीं हैं, तो यह सिर्फ न्यायपालिका नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए चेतावनी है। उन्होंने कहा कि यह घटना संविधान और बाबा साहेब अंबेडकर की विचारधारा के प्रति असहिष्णुता दिखाती है। तेजस्वी यादव ने सीधे तौर पर बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि यह जूता सिर्फ CJI पर नहीं, बल्कि हमारे संविधान और बाबा साहेब अंबेडकर पर फेंका गया है।उन्होंने पूछा,“जो लोग खुद को राष्ट्रवादी कहते हैं, वे अब चुप क्यों हैं? क्या उन्हें यह सब सही लग रहा है? संविधान और दलित विरोधी मानसिकता रखने वाले भाजपाई इस पर कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं दे रहे?” तेजस्वी ने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा हमारे लोकतंत्र की रीढ़ है और इसे बचाना हर नागरिक का कर्तव्य है। तेजस्वी यादव ने देशवासियों से अपील की कि वे ऐसी सोच और प्रवृत्तियों के खिलाफ एकजुट होकर खड़े हों जो न्याय और संविधान की नींव को कमजोर कर रही हैं। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र तभी मजबूत रहेगा जब हम उसकी संस्थाओं का सम्मान करेंगे और संविधान की मर्यादा को बनाए रखेंगे।इस घटना ने न सिर्फ न्यायिक जगत को हिला दिया है, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है। विपक्ष ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरे की चेतावनी बताया है, वहीं पूरे देश में न्यायपालिका की सुरक्षा और गरिमा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

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