नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। अमेरिका की एक अदालत ने भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी को रिश्वतखोरी के आरोप में जहां दोषी ठहराते हुए उन पर कार्रवाई करने की बात कही है, वहीं अब तक कई दिन बीतने के बाद भी अमेरिकी विदेश विभाग इस मुद्दे पर कुछ कहने की स्थिति में नहीं है, जबकि इस तथाकथित ‘रिश्वत कांड’ का बुरा असर भारत में देखने को मिल रहा है, जिसमें कि संसद में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार अडानी के नाम पर मोदी सरकार को घेरने का कोई मौका छोड़ना नहीं चाहते हैं। इस वक्त संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है जिसमें विपक्ष लगातार हंगामा करके अडानी मामले में सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है।
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर से जब इस बारे में पूछा गया तो उनका कहना सिर्फ इतना ही था कि ‘न्याय विभाग के अधिकारी तय करेंगे कि इस मामले पर क्या कहना है। कई लोगों का मानना है कि यह एक एहतियात है ताकि भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।’
संसद के शीतकालीन सत्र में विपक्षी दल अडानी ‘रिश्वत मामले’ पर चर्चा की मांग पर अड़े हुए हैं । हंगामे के कारण संसद के दोनों सदनों में सत्र पूरे समय नहीं चल पा रहा है। पहला दिन पूरा ही अडानी के नाम भेंट चड़ गया। मंगलवार को संविधान दिवस के मौके पर संसद नहीं बैठी पर बुधवार सुबह 11 बजे फिर से शुरू होगा, लेकिन जैसा कि बताया जा रहा है विपक्ष फिर से सदन को हंगामे दार बनाएगा और अडानी मामले में मोदी सरकार से चर्चा कराए जाने की मांग करेगा।
आपको बता दें कि गौतम अडानी पर हाल ही में एक अमेरिकी अदालत ने सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने और रिश्वत की पेशकश करने का आरोप लगाकर गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है। कथित तौर पर अडानी ने बाजार से अधिक कीमत पर सौर ऊर्जा बेचने के लिए कोटेशन प्राप्त करने के लिए आंध्र प्रदेश सहित कई राज्यों के सरकारी अधिकारियों को 2,237 करोड़ रुपये की रिश्वत दी। आरोप लगाने के साथ तर्क यह दिया जा रहा है कि अडानी ग्रीन एनर्जी ने अमेरिकी शेयर बाजार में निवेशकों से पैसा जुटाया है। यदि वे उस देश से धन इकट्ठा करते हैं तो वे अमेरिकी कानूनों का पालन करने के लिए बाध्य हैं। इस मामले में उन्होंने कथित तौर पर अमेरिकी बाजार से रिश्वत की रकम इकट्ठा की जो गैरकानूनी है। नतीजतन, उन्हें मुकदमे का सामना करना पड़ेगा। वहीं, इस पूरे विवाद के बीच अडानी समूह ने अपने सभी निवेशकों को आश्वासन दिया है कि उसकी सूचीबद्ध कंपनियों के पास अगले एक साल के लिए ऋण संबंधी सभी बकाया को पूरा करने के लिए पर्याप्त रकम मौजूद है। उस पर लगाए ये सभी आरोप झूठे हैं, जोकि जल्द साबित भी हो जाएगा, किसी को भी घबराने की आवश्यकता नहीं है।





