नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी पंचायत चुनावों को लेकर जंयत चौधरी की राष्ट्रीय लोकदल (RLD) ने बड़ा राजनीतिक दांव खेला है। मेरठ में शुक्रवार को आयोजित पंचायत चुनाव समिति की बैठक में पार्टी ने घोषणा की कि वह राज्य में होने वाले पंचायत चुनावों में बिना किसी गठबंधन के अकेले मैदान में उतरेगी। इस फैसले की घोषणा प्रदेश संयोजक डॉ. कुलदीप उज्जवल ने की। खास बात यह है कि एनडीए का हिस्सा होने के बावजूद RLD ने यह निर्णय लिया है, जिससे माना जा रहा है कि इससे भाजपा की रणनीति पर असर पड़ सकता है।
मेरठ बैठक में बड़ा ऐलान
मेरठ में आयोजित चुनाव समिति की बैठक के बाद प्रदेश संयोजक डॉ. कुलदीप उज्जवल ने साफ कहा कि पार्टी अपने संगठन और कार्यकर्ताओं के दम पर पंचायत चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा, “पंचायत का चुनाव गांव का चुनाव है और RLD की जड़ें गांवों में गहराई तक जुड़ी हैं। हम ग्रासरूट लेवल पर काम करते हैं और उसी आधार पर पूरे प्रदेश में पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।” डॉ. कुलदीप उज्जवल ने यह भी स्पष्ट किया कि RLD का एनडीए के साथ गठबंधन सिर्फ विधानसभा और लोकसभा चुनावों तक सीमित है। पंचायत चुनाव क्षेत्रीय स्तर का चुनाव है और इसे पार्टी स्वतंत्र रूप से लड़ेगी। उन्होंने कहा कि “हमारी यह बैठक मेरठ में दो मंडलों के लिए क्षेत्रीय बैठक थी। तैयारी पूरी है और हम अपने संगठन व कार्यकर्ताओं के बलबूते चुनाव मैदान में उतरेंगे।” RLD के इस फैसले को उत्तर प्रदेश की राजनीति में गठबंधन समीकरणों के लिहाज से एक अहम मोड़ माना जा रहा है।
पंचायत चुनाव से तय होगी भविष्य की दिशा
बैठक में मेरठ और सहारनपुर मंडल के सभी पदाधिकारी, क्षेत्रीय अध्यक्ष और पंचायत समिति के सदस्य शामिल हुए। बैठक में कई अहम रणनीतिक फैसले लिए गए। बैठक में निर्णय लिया गया कि राज्य के हर जिले में पांच सदस्यीय समिति का गठन किया जाएगा, जो प्रत्याशियों के चयन की जिम्मेदारी निभाएगी। इस समिति में स्थानीय स्तर पर सक्रिय और अनुभवी कार्यकर्ताओं को शामिल किया जाएगा।
डॉ. कुलदीप उज्जवल ने बैठक के बाद कहा कि यह चुनाव RLD के लिए सिर्फ स्थानीय चुनाव नहीं है, बल्कि संगठन की ताकत को जमीनी स्तर तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पंचायत चुनावों में जीत से ही विधानसभा चुनावों की मजबूत नींव रखी जा सकती है। पंचायत स्तर की जीत ही भविष्य की बड़ी राजनीतिक दिशा तय करेगी। यह चुनाव कार्यकर्ताओं को सक्रिय राजनीति में भागीदारी का अवसर देगा। RLD का मानना है कि पंचायत चुनाव के जरिए पार्टी की गांव-गांव तक पकड़ मजबूत होगी, जिससे आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में संगठन को व्यापक लाभ मिल सकता है।





