back to top
31.1 C
New Delhi
Friday, April 3, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

केरल के शोधकर्ताओं ने उपमहाद्वीप की पहली काली गिलहरी का दस्तावेज बनाया

तिरुवनंतपुरम, 22 जुलाई (आईएएनएस)। भारतीय उपमहाद्वीप में पाई गई पहली काली गिलहरी को यहां वैज्ञानिक रूप से प्रलेखित किया गया है। केरल के अनुसंधान पेशेवरों की एक टीम ने 13 साल मेहनत कर काली गिलहरी का दस्तावेज तैयार किया है। काली गिलहरी को वैज्ञानिक रूप से साबित करने के लिए विस्तृत अध्ययन रिपोर्ट इंडियन एकेडमी ऑफ साइंस, बेंगलुरु द्वारा प्रकाशित करंट साइंस के नवीनतम अंक में प्रकाशित हुई थी। शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला है कि यह एक बांझ मादा काली गिलहरी है। घटनाओं के क्रम का पता लगाते हुए, केरल राज्य जैव विविधता बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वी. ओमन ने आईएएनएस को बताया कि यह सब 2008 में शुरू हुआ, जब केंद्रीय कंद फसल अनुसंधान संस्थान से जुड़े खेत मजदूरों के एक समूह ने यहां एक काले रंग का छोटा जीव देखा। ओमन 2008 में केरल विश्वविद्यालय में जूलॉजी विभाग में प्रोफेसर थे। उन्हें संस्थान में काम कर रहे अपने एक पूर्व छात्र का फोन आया कि यहां एक काली गिलहरी देखी गई है, तो उन्हें आश्चर्य हुआ। ओमन ने कहा, मैं अपने एक छात्र के साथ उनके खेत में गया और उस प्राणी को देखकर सुखद आश्चर्य हुआ, जिसमें चूहे और गिलहरी दोनों की विशेषताएं थीं। मैंने इसे अपने कब्जे में ले लिया और इसे अपने विभाग में लाया और एक पिंजरे में रख दिया। फिर हमें वन विभाग से प्राणी को रखने की औपचारिक अनुमति मिली। हमने तस्वीरें लीं और इसे जंतु विशेषज्ञों के पास भेज दिया, जो यह कहते हुए हमारे पास वापस आए कि यह चूहा नहीं है। फिर हमने यूके में एक गिलहरी विशेषज्ञ से संपर्क किया, जिन्होंने पुष्टि की कि यह काली गिलहरी है। ओमन याद करते हैं कि एक दिन यह बीमार लग रहा था और वह इसे स्थानीय पशु चिकित्सालय ले गए ,जहां पशु चिकित्सकों ने इसे विटामिन-डी सिरप देने का सुझाव दिया और जल्द ही यह फिर से सक्रिय हो गया। ओमन ने कहा, बाद में हमने चिड़ियाघर के अधिकारियों की मदद से इस गिलहरी को सामान्य किस्म की गिलहरी के बगल में इसे दूसरे पिंजरे में रखवाने में कामयाब रहे। फिर उन्होंने दो अलग-अलग गिलहरियों का अध्ययन करने और जीनोमिक का पालन करने का फैसला किया। अध्ययन के बाद डीएनए परीक्षण किए गए। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि इसमें सामान्य गिलहरी की 98 प्रतिशत विशेषताएं थीं। बाद में उनके निष्कर्षो को और मजबूत करने के लिए जैव सूचना विज्ञान विधियों का उपयोग करके और अधिक अध्ययन किए गए। इस बीच, ओमन 2010 में सेवानिवृत्त हुए और दो साल बाद गिलहरी की मृत्यु हो गई। लेकिन ओमन ने देखा कि उस मृत काली गिलहरी को संरक्षित किया गया था और अब यह विश्वविद्यालय की प्रयोगशाला में है। ओमन ने कहा, समय बीतता गया और 2015 में मुझे लगा कि शोध को आगे बढ़ाया जाना चाहिए और मैंने डेटा एकत्र करना शुरू कर दिया। फिर मैंने अपने सभी छात्रों से संपर्क कया, जो काली गिलहरी के बारे में अध्ययन में मेरे साथ थे। बोर्ड अध्यक्ष के रूप में मेरा कार्यकाल समाप्त होने के बाद पिछले साल हमने अपना वैज्ञानिक अध्ययन पूरा किया। हम निष्कर्ष को प्रकाशित करवाना चाहते थे। आखिरकार, इसे प्रकाशित किया गया है और हम इससे बेहद उत्साहित हैं। –आईएएनएस एसजीके/एएनएम

Advertisementspot_img

Also Read:

छुट्टी रद्द होते ही GenZ कर्मचारी का अनोखा रिएक्शन, एयरपोर्ट से बोलीं- अब 10 दिन बाद ही खुलेगा लैपटॉप

नई दिल्‍ली/रफ्तार डेस्‍क । सोचिए, आप फ्लाइट पकड़ने ही वाले हों और तभी ऑफिस से मैसेज आए कि आपकी छुट्टियां रद्द कर दी गई...
spot_img

Latest Stories

ऐरा का मतलब – Aira Name Meaning

Aira Name Meaning – ऐरा नाम का मतलब :...

फिल्म Bhooth Bangla एक्ट्रेस Wamiqa Gabbi के बोल्ड फोटोशूट ने हिलाया इंटरनेट, फिदा हुए फैंस

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। बॉलीवुड एक्ट्रेस वामिका गब्बी (Wamiqa...

Avadh Ojha ने की नीतीश कुमार को PM बनाने की वकालत, BJP को दे डाली नसीहत

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बिहार की राजनीति में एक बार...

हर रोज बढ़ रहा गर्मी का सितम, ऐसे रखें अपने साथ-साथ परिवार का ख्याल

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। दिन पर दिन गर्मी बढ़ती...

Sanjay Nishad के बयान से यूपी सियासत गरम, पश्चिमी यूपी को लेकर BJP की बढ़ी टेंशन

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी...

45 की उम्र में भी Shweta Tiwari ढा रही है कहर, रेड साड़ी में देखें एक्ट्रेस का ये अंदाज

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। श्वेता तिवारी अपनी फिटनेस से...
⌵ ⌵ ⌵ ⌵ Next Story Follows ⌵ ⌵ ⌵ ⌵