नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। राजस्थान के अजमेर में स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। यह मामला अब कोर्ट तक पहुंच चुका है, लेकिन मुस्लिम पक्ष को अभी तक कोई राहत नहीं मिली है। दरगाह की देखरेख करने वाली संस्था “अंजुमन्” ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही यह आदेश दे चुका है कि धार्मिक स्थलों से जुड़े नए मुकदमे न दर्ज हों, सर्वे न कराए जाएं और कोई निर्णायक आदेश न दिया जाए। अंजुमन ने दावा किया कि अजमेर की सिविल कोर्ट में जो सुनवाई चल रही है, वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ है। इसी आधार पर उन्होंने हाईकोर्ट से मामले पर रोक लगाने की मांग की थी।
राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला क्या आया?
राजस्थान हाईकोर्ट ने अंजुमन की याचिका न तो खारिज की है, न ही सिविल कोर्ट की सुनवाई पर रोक लगाई है। कोर्ट ने कहा कि वह फिलहाल इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगा। अब अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी।
केंद्र सरकार का क्या रुख रहा?
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने अंजुमन की याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि अजमेर की सिविल कोर्ट में जो मुकदमा चल रहा है, उसमें अंजुमन अभी तक पक्षकार (पार्टी) नहीं है, इसलिए वो हाईकोर्ट से दखल की मांग नहीं कर सकती। अंजुमन की तरफ से बताया गया है कि उन्होंने सिविल कोर्ट में खुद को पक्षकार बनाने की याचिका पहले ही दाखिल की हुई है। इस पर शनिवार, 19 अप्रैल को फिर सुनवाई होनी है, जिसमें उनके वकील आशीष कुमार सिंह व्यक्तिगत रूप से पेश होकर अपनी दलीलें देंगे।
क्यों है यह विवाद अहम?
यह विवाद सिर्फ एक कानूनी मामला नहीं है, बल्कि एक भावनात्मक और सांस्कृतिक विषय भी बन गया है। अजमेर शरीफ देशभर में एक श्रद्धा का केंद्र रहा है, और यहां का हर फैसला कई लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ है। अब सबकी निगाहें राजस्थान हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं। सभी को उम्मीद है कि शायद अगली सुनवाई में इस उलझे हुए विवाद को लेकर कुछ स्पष्टता सामने आए।





