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Tuesday, March 10, 2026
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राफेल में भरी उड़ान, अंबाला के आसमान में लहराया भारत का परचम

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को हरियाणा के अंबाला एयरफोर्स स्टेशन से राफेल फाइटर जेट में उड़ान भरकर नया इतिहास रच दिया।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को हरियाणा के अंबाला एयरफोर्स स्टेशन से राफेल फाइटर जेट में उड़ान भरकर नया इतिहास रच दिया। इस मौके पर एयर चीफ मार्शल वी. आर. चौधरी, एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वेस्टर्न एयर कमांड और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। यह उड़ान न सिर्फ उनके साहस और नेतृत्व का प्रतीक है, बल्कि भारत की बढ़ती रक्षा क्षमता और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी दुनिया के सामने प्रदर्शित करती है।

दूसरा मौका जब राष्ट्रपति बनीं फाइटर पायलट की साथी

इससे पहले अप्रैल 2023 में राष्ट्रपति मुर्मू ने असम के तेजपुर एयरफोर्स स्टेशन से सुखोई-30 एमकेआई में उड़ान भरी थी। इस तरह वह फाइटर जेट में उड़ान भरने वाली तीसरी भारतीय राष्ट्रपति और दूसरी महिला राष्ट्रपति बन गईं। उनसे पहले डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम और प्रतिभा पाटिल भी वायुसेना के लड़ाकू विमानों में उड़ान भर चुकी हैं। राफेल फाइटर जेट को फ्रांसीसी कंपनी दसॉ एविएशन ने बनाया है। सितंबर 2020 में इसे औपचारिक रूप से भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था। पहले पाँच राफेल विमान 27 जुलाई 2020 को फ्रांस से भारत आए थे और इन्हें 17 स्क्वाड्रन गोल्डन एरोज़ में तैनात किया गया। राफेल जेट ने हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर में आतंकवादी ठिकानों पर सटीक हमले कर अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया था।

भारत-फ्रांस रक्षा साझेदारी का नया अध्याय

राष्ट्रपति मुर्मू की यह उड़ान ऐसे समय में हुई है जब भारत और फ्रांस के बीच नौसेना के लिए 26 राफेल मरीन विमानों की डील को मंजूरी मिल चुकी है। इस समझौते में 22 सिंगल-सीटर और 4 ट्विन-सीटर ट्रेनर जेट शामिल होंगे। यह डील प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) की मंजूरी के बाद पक्की हुई है। इसके तहत फ्रांस भारत को मरीन (एम) वर्जन के 26 राफेल विमान सौंपेगा, जो नौसेना की ताकत को कई गुना बढ़ा देंगे। यह उड़ान भारतीय वायुसेना की आधुनिकता और आत्मनिर्भरता की झलक पेश करती है। अंबाला एयरबेस राफेल स्क्वाड्रन का प्रमुख केंद्र है, जो भारत की हवाई सुरक्षा की रीढ़ की हड्डी माना जाता है। राष्ट्रपति, जो तीनों सेनाओं की सुप्रीम कमांडर हैं, का यह अनुभव देश के रक्षा तंत्र के प्रति विश्वास और गर्व का संदेश देता है।

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