नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ मकान में नकदी बरामद होने के आरोपों के चलते केंद्र सरकार उन्हें पद से हटाने के लिए संसद के मॉनसून सत्र में महाभियोग प्रस्ताव ला सकती है। इस प्रस्ताव को लोकसभा में पेश करने के लिए कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक हैं।
सूत्रों के अनुसार, इस प्रक्रिया की शुरुआत हो चुकी है और सांसदों के हस्ताक्षर जुटाए जा रहे हैं। विपक्षी दलों ने भी सरकार को इस प्रस्ताव पर समर्थन देने का भरोसा दिलाया है और उनके सांसद भी हस्ताक्षर कर रहे हैं। महाभियोग प्रस्ताव संसद में पेश होने के बाद एक जांच समिति का गठन किया जाएगा, जो आरोपों की जांच कर रिपोर्ट पेश करेगी। इसके बाद संसद दोनों सदनों में बहस और मतदान के आधार पर निर्णय लेगी।
महाभियोग को लेकर एकजुट हो सकते हैं सत्तापक्ष और विपक्ष
जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों एक साथ आने की संभावना बन रही है। रिपोर्ट के अनुसार, एआईसीसी संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने इस संबंध में कांग्रेस के सदन में नेताओं को एक पत्र भेजा है। पत्र ऐसे समय में भेजा गया है जब बीजेपी और विपक्षी सांसदों दोनों से प्रस्ताव पर हस्ताक्षर जुटाने की कवायद तेज हो गई है।
जस्टिस वर्मा के घर से बरामद हुई थी 15 करोड़ की नकदी
इस साल मार्च 2025 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा के आवास से 15 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए थे। मामले की जांच के लिए गठित सुप्रीम कोर्ट की इंटरनल इन्क्वायरी कमेटी ने उन्हें दोषी ठहराया है। बावजूद इसके, जस्टिस वर्मा ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है।
अब केंद्र सरकार उन्हें पद से हटाने के लिए 21 जुलाई से 12 अगस्त तक चलने वाले संसद के मॉनसून सत्र में महाभियोग प्रस्ताव ला सकती है। यदि यह प्रस्ताव पारित होता है, तो संसद के नए भवन में यह पहली महाभियोग कार्यवाही होगी, जो एक ऐतिहासिक कदम माना जाएगा।





