भोपाल 8 जुलाई (आईएएनएस) । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के दूसरे कार्यकाल में हुए मंत्रिमंडल के पहले विस्तार में भले ही मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी बढ़ गई हो, मगर दमोह से सांसद प्रहलाद पटेल का सियासी कद कम हो गया है। इसकी बड़ी वजह दमोह विधानसभा के उपचुनाव में भाजपा को मिली हार को माना जा रहा है। राज्य की सियासत में भाजपा में प्रहलाद पटेल की गिनती कद्दावर नेताओं के तौर पर रही है। इतना ही नहीं, कई बार तो उन्हें मध्य प्रदेश में बड़े विकल्प के तौर पर भी देखा जाता रहा है। उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती का विकल्प भी माना जाता रहा है क्योंकि वे दोनों लोधी समुदाय से आते हैं। मोदी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के समय पटेल को लेकर कई तरह की चर्चाएं जोरों पर रही है क्योंकि अभी हाल ही में दमोह में हुए उपचुनाव में भाजपा के उम्मीदवार राहुल लोधी को हार का सामना करना पड़ा था। उपचुनाव के नतीजे के बाद दमोह क्षेत्र के पूर्व मंत्री जयंत मलैया और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल दोनों के बीच चल रही तनातनी खुलकर सामने आई थी। पटेल पहले पर्यटन और संस्कृति मंत्रालय के राज्य मंत्री थे और उन्हें स्वतंत्र प्रभार था, मगर मंत्रिमंडल विस्तार में उनका स्वतंत्र प्रभार खत्म कर उन्हें जलशक्ति का राज्य मंत्री बना दिया गया है। उन्हें जो विभाग मिला है, ज्यादा असरकारक नहीं है। इस बदलाव को पटेल के सियासी कद के कम होने के तौर पर देखा जा रहा है। मोदी मंत्रिमंडल में हुए विस्तार में जहां राज्य से थावर चंद गहलोत को मंत्री पद से हटाकर राज्यपाल बनाया गया है, तो वहीं दो नए चेहरों ज्योतिरादित्य सिंधिया और डॉ. वीरेंद्र कुमार खटीक को जगह मिली है। इस तरह पहले राज्य से चार मंत्री थे और अब बढ़कर पांच हो गए है। कुल मिलाकर राज्य की मोदी सरकार में हिस्सेदारी बढ़ी है। राजनीतिक विश्लेषक रवींद्र व्यास का मानना है कि भाजपा ने पूरी ताकत से दमोह का उप-चुनाव लड़ा था। पार्टी इसे काफी अहम भी मान रही थी क्योंकि दल बदल करके आए राहुल लोधी को उम्मीदवार बनाया था, जो प्रहलाद पटेल के करीबी है, वहीं पार्टी के पुराने नेता जयंत मलैया का टिकट कटा था। इसके साथ ही यह सीट लोधी बाहुल्य है और यहां से सांसद प्रहलाद पटेल भी लोधी हैं। इसके बावजूद राहुल लोधी चुनाव हार गए। इसके अलावा चुनाव में कई ऐसी बातें भी सामने आई जो पटेल के खिलाफ गई। भाजपा सूत्रों की मानें तो पार्टी के पास दमोह उप-चुनाव के बाद जो रिपोर्ट आई है वह भी यही बताने वाली रही कि पटेल के रवैए से स्थानीय लोग खुश नहीं है। वहीं राहुल लोधी को लेकर भी लोगों में नाराजगी थी और उसका नतीजा भाजपा के खाते में पराजय के तौर पर आया है। –आईएएनएस एसएनपी/एएसएन/आरजेएस




