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प्रधानमंत्री से मराठा आरक्षण समेत 12 मुद्दों पर हुई सकारात्मक चर्चा: उद्धव ठाकरे

नई दिल्ली, 08 जून (हि.स.)। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से उनके आवास पर मुलाकात के बाद कहा कि मैंने प्रधानमंत्री के समक्ष 12 विषयों को उठाया है। मैं प्रधानमंत्री को धन्यवाद देता हूं कि मैं और मेरे सहयोगी संतुष्ट हैं। केंद्र में लंबित मुद्दों पर प्रधानमंत्री निश्चित तौर पर आगे की कार्यवाही करेंगे। दरअसल, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री मोदी से मिलकर मराठा आरक्षण सहित केंद्र में लंबित 12 मुद्दों को सुलझाने का अनुरोध किया। इस मौके पर उपमुख्यमंत्री अजित पवार और लोक निर्माण मंत्री व मराठा आरक्षण सब-कमेटी के प्रमुख अशोक चव्हाण भी मौजूद थे। प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद दिल्ली के महाराष्ट्र सदन में प्रेस वार्ता कर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री के समक्ष उठाए गए मुद्दों पर पत्रकारों को विस्तृत जानकारी दी। उद्धव ठाकरे ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री के समक्ष 12 विषयों को उठाया और उन सभी पर चर्चा की। इनमें मराठा आरक्षण, अन्य पिछड़ा वर्ग को दिए जाने वाला आरक्षण, पदोन्नति में आरक्षण, वस्तु एवं सेवा कर की बकाया राशि विषय प्रमुख थे। ठाकरे ने कहा कि प्रधानमंत्री से राज्य के लंबित मुद्दों पर अच्छी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने सभी मुद्दों को गंभीरता से सुना। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र के पास लंबित मुद्दों पर सकारात्मक निर्णय की उम्मीद है। मैं प्रधानमंत्री को धन्यवाद देता हूं। कहीं कोई राजनीतिक जुनून नहीं था। मैं और मेरे सहयोगी संतुष्ट हैं। इन सवालों पर प्रधानमंत्री निश्चित तौर पर आगे की कार्यवाही करेंगे। ठाकरे ने एसईबीसी मराठा आरक्षण पर कहा कि केंद्र सरकार को शिक्षा और रोजगार में आरक्षण के लिए मराठा समुदाय की मांगों को ध्यान में रखते हुए भारत के संविधान के अनुच्छेद 15(4) और 16(4) में संवैधानिक संशोधन करने के लिए कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि मराठा आरक्षण को लेकर राज्य सरकार भी पुन: एक याचिका दायर करने जा रही है। मैं इस तथ्य का स्वागत करता हूं कि केंद्र सरकार 102वें संशोधन की सीमा के भीतर सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर करेगी। पिछड़ा वर्ग को पदोन्नति में आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पदोन्नति में आरक्षण के महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर कदम उठाए और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग को न्याय दिलाए। यह केवल महाराष्ट्र की ही नहीं, बल्कि कई अन्य राज्यों की भी समस्या है। इसके लिए पूरे देश के लिए एक समग्र नीति की आवश्यकता है। केंद्र सरकार को इस संबंध में लंबित याचिका को जल्द से जल्द हल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध करना चाहिए। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस साल 5 मई को महाराष्ट्र सरकार द्वारा 2018 में लाए गए मराठा समुदाय के लिए सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि यह पहले लगाए गए 50 प्रतिशत की सीमा से अधिक है। ऐसे में मराठा समुदाय के लोगों को शैक्षणिक और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग के रूप में घोषित नहीं किया जा सकता है। हिन्दुस्थान समाचार/सुशील

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