back to top
34.1 C
New Delhi
Thursday, March 12, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

पीएम ने बिरसा मुंडा स्मृति उद्यान सह स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय का किया लोकार्पण, कहा- जहां बिरसा के कदम पड़े, वह हम सबके लिए पवित्र तीर्थ

रांची, 15 नवंबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रांची में स्थापित भगवान बिरसा मुंडा स्मृति उद्यान सह स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय सोमवार को राष्ट्र को समर्पित किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह संग्रहालय भगवान बिरसा मुंडा सहित भारत के कोटि-कोटि स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृतियों को समर्पित है। 15 नवंबर भगवान बिरसा मुंडा की जन्म जयंती है और इसे हमने जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि रांची का यह संग्रहालय, स्वाधीनता संग्राम में आदिवासी नायक-नायिकाओं के योगदान का, विविधताओं से भरी हमारी आदिवासी संस्कृति का जीवंत अधिष्ठान बनेगा। भारत की पहचान और भारत की आजादी के लिए लड़ते हुए भगवान बिरसा मुंडा ने अपने आखिरी दिन रांची की इसी जेल में बिताए थे। उन्होंने कहा कि जहां बिरसा के कदम पड़े हों, वह हम सबके लिए पवित्र तीर्थ है। प्रधानमंत्री ने देश के इतिहासकारों का आह्वान किया कि वे बिरसा मुंडा, बाबा तिलका मांझी, सिद्धो-कान्हू, तेलंगा खड़िया जैसे आदिवासी योद्धाओं और विभूतियों के संघर्ष, त्याग और बलिदान से जुड़े इतिहास का पुनर्लेखन करें, क्योंकि इन सेनानियों को जो पहचान मिली थी, वह आज तक नहीं मिली। यह हमारी जिम्मेदारी है कि अपनी प्राचीन विरासत और इतिहास को नयी चेतना दें। उन्होंने देश के विद्यार्थियों से अपील की कि वे रांची स्थित इस संग्रहालय में जायें और जनजातीय समाज की संस्कृति को देखिए, समझिए। यहां बहुत कुछ ऐसा है, जिसे हमें सीखना-समझना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि देशभर में ऐसे 9 संग्रहालय बनने हैं। इन म्यूजियम से ना सिर्फ देश की नयी पीढ़ी आदिवासी इतिहास के गौरव से परिचित होगी बल्कि इन क्षेत्रों में पर्यटन को भी नयी गति मिलेगी। यह आदिवासी समाज के गीत- संगीत, कला, कौशल, शिल्पकलाओं का भी संरक्षण करेगी। स्वंत्रता संग्राम में आदिवासी समाज और इसके योद्धाओं के संघर्ष को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पूरे स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कोई भी कालखंड ऐसा नहीं रहा, जब देश के किसी न किसी हिस्से में आदिवासी समाज अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ क्रांति नहीं कर रहा था। भगवान बिरसा मुंडा की स्मृतियों को नमन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने अपने समाज में फैली कुरीतियों को और गलत सोच के खिलाफ आवाज उठाने का साहस किया बल्कि उनको बदलने की भी ताकत रखी। उन्होंने विदेश सोच और ताकत को घुटनों पर ला दिया था। पीएम मोदी ने कहा कि वो केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक परंपरा हैं। प्रधानमंत्री ने झारखंड के लोगों को राज्य स्थापना दिवस की भी बधाई दी। झारखंड के गठन मेंपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि अटल जी की इच्छा के कारण झारखंड राज्य बना। उन्होंने ही अलग आदिवासी मंत्रालय का गठन किया था। प्रधानमंत्री ने कहा, झारखंड राज्य स्थापना दिवस के मौके पर अटल जी के चरणों में नमन करते हुए श्रद्धांजलि देता हूं। बिरसा मुंडा स्मृति उद्यान सह स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय के लोकार्पण समारोह के दौरान रांची में आयोजित समारोह में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा, झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, रांची के सांसद संजय सेठ सहित कई लोग उपस्थित रहे। रांची में स्थापित इस संग्रहालय एवं उद्यान के निर्माण में कुल 142 करोड़ की लागत आयी है और इसमें केंद्र एवं राज्य दोनों सरकारों ने सहयोग किया है। यह स्मृति स्थल कई मायनों में अनूठा है। यहां भगवान बिरसा मुंडा की 25 फीट ऊंचाई की प्रतिमा स्थापित की गयी है, जिसका निर्माण जाने-माने मूर्तिकार श्री राम सुतार के निर्देशन में हुआ है। रांची शहर के बिल्कुल बीचोबीच स्थित इस परिसर में पहले सेंट्रल जेल हुआ करती थी, जिसे लगभग एक दशक पहले होटवार नामक स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया। अब यह पुरानी और ऐतिहासिक जेल परिसर ऐसे संग्रहालय के रूप में विकसित होकर तैयार है, जहां बिरसा मुंडा के साथ-साथ 13 जनजातीय नायकों की वीरता की गाथाएं प्रदर्शित की जायेंगी। सिदो-कान्हू,नीलांबर-पीतांबर, दिवा किशुन, गया मुंडा, तेलंगा खड़िया,जतरा टाना भगत, वीर बुधु भगत जैसे जनजातीय सेनानियों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ अद्भुत लड़ाई लड़ी थी। इन सभी की प्रतिमाएं भी संग्रहालय में लगायी गयी हैं। जेल के एक बड़े हिस्से को अंडमान-निकोबार की सेल्यूलर जेल की तर्ज पर विकसित किया गया है। इसकी दीवारों को मूल रूप में संरक्षित किया गया है। इसमें पुरातत्व विशेषज्ञों की मदद ली गयी है। जेल का मुख्य गेट इस तरह बनाया गया है कि वहां 1765 के कालखंड की स्थितियां और उस वक्त आदिवासियों के रहन-सहन और जीवन शैली को जीवंत किया जा सके। जेल का अंडा सेल, अस्पताल और किचन को भी पुराने स्वरूप में संरक्षित किया जा रहा है। संग्रहालय से जुड़े उद्यान में म्यूजिकल फाउंटेन, इनफिनिटी पुल और कैफेटेरिया का भी निर्माण कराया गया है। –आईएएनएस एसएनसी/आरजेएस

Advertisementspot_img

Also Read:

अलविदा MiG 21! 6 दशक के बाद एयर फोर्स से MiG 21 की हुुई विदाई, सेवामुक्त विमान का कहां होता है इस्‍तेमाल?

नई दिल्‍ली, रफ्तार डेस्‍क । भारतीय वायु सेना ने शुक्रवार को मिग-21 लड़ाकू विमानों को आधिकारिक रूप से सेवानिवृत्त कर दिया, जिससे छह दशक...
spot_img

Latest Stories

LPG Cylinder Consumption: देश के किन राज्यों में होती है LPG की सबसे ज्यादा खपत, जानिए टॉप- 5 राज्य

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और...

2027 चुनाव से पहले पश्चिमी UP पर सपा का फोकस, दादरी से अखिलेश यादव शुरू करेंगे अभियान

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा...

Share Market Today: शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, 873 अंक टूटा Sensex, Nifty भी 254 अंक फिसला

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार...

डोनाल्ड ट्रंप का Section 301: क्या है ये कानून, जिससे भारत-चीन सहित 16 देशों पर पड़ सकता है असर

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। अमेरिका में Donald Trump प्रशासन ने...

20 साल से इसी दिन का इंतजार था: कौन है कमल सिंह जामवाल? जिसने फारूक अब्दुल्ला पर तान दी बंदूक

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल...