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Tuesday, April 7, 2026
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Freebies पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता- सब मुफ्त में मिलेगा तो लोग काम क्यों करेंगे?

आज सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने शहरी क्षेत्रों गरीब बेघर व्यक्तियों के आश्रय के अधिकार से संबंधित एक लंबित मामले की सुनवाई के दौरान ये निर्देश देते हुए, की ये सख्‍त टिप्पणी। जाने पूूरा मामला?

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने बेघर व्यक्तियों को रैन बसेरा उपलब्ध करवाने के अधिकार से जुड़े मामले की सुनवाई 12 फरवरी को की। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव से पहले राजनीतिक पार्टियों की तरफ से किए जाने वाले फ्रीबीज़ के वादों पर नाराज़गी जाहिर की है। कोर्ट ने कहा- आजकल लोग फ्री की सुविधाओं के चलते काम करने से कतराते हैं। कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई कि लोगों में हर चीज़ फ्री में पाने की लालसा बढ़ रही है और ऐसे परजीवियों का एक बड़ा तबका देश में तैयार हो रहा है। 

बेघर व्यक्तियों के रैन बसेरा पर सुप्रीम कोर्ट

सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने बताया कि केंद्र सरकार गरीबी को दूर करने लगातार आवासों जैसी कई योजनां निकाल रही है ताकि इसका समाधान हो सके व गरीबी जड़ से मिट सके। तो इसपर सुप्रीम कोर्ट के दो बैचों द्वारा इसपर सुनवाई करते हुए ये आदेश देते हुए पूछा गया कि आ‍खिर केंद्र कब इन कार्यक्रमों को लागू करेगी। वहीं इस सुनवाई पर नाराजगी जताते हुए जजों की बैच ने कहा, राजनीतिक दलों को जनता को मुफ्तखोरी की आदत डालने की बजाय उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने पर ध्‍यान देना चाहिए इससे लोगों में मुफ्तखोरी की जगह मेहनत करने की आदत पड़ेगी। 

अब मामले की सुनवाई अगले छह हफ्ते बाद

वहीं सुप्रीम कोर्ट ने सख्‍त टिप्पणी करते हुए ये भी कहा कि, राजनीतिक दलों द्वारा वोट बैंक भरने के लालच में समाज में एक बड़े तबके का मुफ्तखोरों का वर्ग तैयार होते जा रहा है। लोगों को फ्री में बिना काम किए हर चीज पाने की लालसा बढ़ती ही जा रही है। राजनीतिक दलों को मुफ्त राशन पैसा देने के बजाय गरीबी दूर करने ऐसे लोगों को समाज के मुख्यधारा का हिस्सा बनाना चाहिए इससे उनकी अपनी तरक्की तो होगी ही साथ ही देश का विकास भी होगा। वहीं अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमनी ने बताया कि सरकार गरीबी दूर करने ऐसे योजनाओं को फाइनल करने में लगी हुई है। इससे जो गरीब बेघर व्यक्तियों के आवास और दूसरी मदद में भी कारगर होगा। वही जजों की बैच ने अटॉर्नी जनरल से इसे वेरिफाई करने का आदेश देते हुए इस मामले की सुनवाई की तारीख छह हफ्ते बाद की दी है। अब इसकी सुनवाई छह हफ्ते बाद होगी

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