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Tuesday, March 10, 2026
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भारत के खिलाफ पाकिस्तान को मिला था चीन का साथ, वायुसेना के महानिदेशक ने खोल दिया पूरा चिठ्ठा

पाकिस्तान ने ड्रोन, मिसाइलों और भारी गोलाबारी के साथ भारत के नागरिक और सैन्य क्षेत्रों को निशाना बनाया था। एयर स्ट्राइक में पाकिस्तान ने चीनी लड़ाकू विमान का इस्तेमाल किया।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के बीच नई जानकारी सामने आई है। भारत ने पहली बार सार्वजनिक रूप से खुलासा किया है कि पाकिस्तान ने कुछ दिन पहले भारत पर किए गए हवाई हमलों में चीन द्वारा आपूर्ति की गई मिसाइलों का इस्तेमाल किया था।

वायु सेना के महानिदेशक एयर मार्शल ए.के. भारती ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा, “पाकिस्तान द्वारा भारत पर दागी गई मिसाइलों में चीन की पीएल-15 लंबी दूरी की मिसाइल भी शामिल थी।” यह खुलासा करते हुए उन्होंने मीडिया को चीनी मिसाइलों के अवशेष भी दिखाए, जिनका एक हिस्सा पंजाब के होशियारपुर में मिला था।

भारतीय वायु सेना ने न केवल पाकिस्तानी ड्रोन और मिसाइलों को मार गिराया बल्कि उनके स्रोत का भी पता लगाया। एयर मार्शल ने कहा, “पाकिस्तान ने पीएल-15 जैसी चीनी मिसाइलों के साथ-साथ तुर्की के बायकर वाईएचए III कामिकेज़ ड्रोन का भी इस्तेमाल किया। भारत ने अब तक चीन-पाकिस्तान सैन्य गठबंधन पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की थी, लेकिन यह पहली बार है जब भारत ने सीधे तौर पर चीन का नाम लिया है।” सूत्रों के अनुसार, चीन और पाकिस्तान के बीच दशकों पुराने रणनीतिक संबंध हैं, जिनमें राजनीतिक, आर्थिक और परमाणु सहयोग के साथ-साथ हथियार आपूर्ति भी शामिल है। 

पीएल-15 मिसाइल

पीएल-15 एक आधुनिक, लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल है जिसे एविएशन इंडस्ट्री कॉरपोरेशन ऑफ चाइना (AVIC) द्वारा विकसित किया गया है। यह मिसाइल 200 किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित लक्ष्यों को भेद सकती है। इसका निर्यात संस्करण, PL-15E, पाकिस्तान के JF-17 ब्लॉक III और J-10CE लड़ाकू विमानों में लगाया गया है। मिसाइल में एक परिष्कृत मार्गदर्शन प्रणाली है, जिसमें जड़त्वीय नेविगेशन, चीन के बेइदोउ उपग्रह अपडेट, दोहरे-मार्ग डेटा लिंक और AESA रडार शामिल हैं। इसकी गति मैक 5 से अधिक हो सकती है तथा इसके वारहेड का वजन 20 से 25 किलोग्राम है।

भारत द्वारा चीन को मिसाइल आपूर्तिकर्ता के रूप में सार्वजनिक रूप से निशाना बनाना एक रणनीतिक संकेत है। इससे पता चलता है कि चीन पाकिस्तान के साथ अपने सैन्य संबंधों की जिम्मेदारी से बच नहीं सकता, विशेषकर ऐसे समय में जब चीन खुद को एक शांति-स्थापना करने वाले देश के रूप में पेश करना चाहता है।

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