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पाक अफगान शरणार्थियों के लिए सीमाएं खुली रखे : अमेरिका

नई दिल्ली, 5 अगस्त (आईएएनएस)। अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने कहा है कि वाशिंगटन चाहता है कि पाकिस्तान अफगानिस्तान से लगी अपनी सीमाओं को अफगान शरणार्थियों के लिए खुला रखे। डॉन न्यूज ने अफगान नागरिकों के लिए नए अमेरिकी शरणार्थी प्रवेश कार्यक्रम पर बुधवार को पत्रकारों को ब्रीफिंग करते हुए अधिकारी के हवाले से कहा, पाकिस्तान जैसी जगह में, यह महत्वपूर्ण होगा कि उनकी सीमाएं खुली रहें। अधिकारी ने कहा, जाहिर है, अगर लोग उत्तर की ओर जाते हैं या अगर वे ईरान के रास्ते तुर्की जाते हैं, (उनके पास) देश में प्रवेश करने के साथ-साथ सरकार या यूएनएचसीआर के साथ पंजीकरण करने का अवसर है। सोमवार को घोषित किया गया नया कार्यक्रम उन लोगों पर लागू होता है जिन्होंने यूएस-वित्त पोषित परियोजनाओं पर काम किया है और अमेरिका स्थित मीडिया या गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) द्वारा नियोजित अफगानों पर लागू होता है। पाकिस्तान के अलावा, विदेश विभाग ने तुर्की से कहा है कि वह अमेरिका में फिर से बसने से पहले अफगानों को 14 महीने तक देश में रहने की अनुमति दे। इस सप्ताह की शुरूआत में अपनी वाशिंगटन यात्रा के दौरान पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोईद युसूफ ने कहा था कि विस्थापित अफगानों को उनके देश में धकेलने के बजाय उनके देश के अंदर रखने की व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने कहा, उन्हें दर-बा-दार (बेघर) क्यों बनाया जाए? उनके लिए उनके देश के अंदर व्यवस्था करें। पाकिस्तान में अधिक शरणार्थियों को लेने की क्षमता नहीं है। तुर्की सरकार ने अफगानों को फिर से बसाने के लिए तीसरे देशों का उपयोग करने की अमेरिकी योजना की भी आलोचना की है। देश ने यह कहा है कि इस कदम से क्षेत्र में प्रवासी संकट पैदा हो जाएगा।। तुर्की के विदेश मंत्रालय ने अंकारा में जारी एक बयान में कहा, हम अपने देश से सलाह किए बिना अमेरिका द्वारा लिए गए गैर-जिम्मेदाराना फैसले को स्वीकार नहीं करते हैं। अगर अमेरिका इन लोगों को अपने देश में ले जाना चाहता है, तो उन्हें विमानों से सीधे उनके देश में स्थानांतरित करना संभव है। डॉन न्यूज की रिपोर्ट में कहा गया है कि दो देश हैं जो इस पुनर्वास योजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, ईरान और पाकिस्तान। चूंकि अमेरिका के ईरान के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं, इसलिए अमेरिकी नीति निर्माता पाकिस्तान को इस कार्यक्रम को लागू करने में मदद करने के लिए देख रहे हैं। हालांकि पाकिस्तान ऐसा करने से कतरा रहा है। 1979 से, पाकिस्तान ने लाखों अफगानों की मेजबानी की है और 30 लाख से अधिक स्थायी रूप से देश में बसे हुए हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों का तर्क है कि उनकी अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत नहीं है कि अधिक शरणार्थियों को रख सके। –आईएएनएस आरएचए/एएनएम

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