नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। जाने माने समाजसेवक और पद्म श्री विजेता जितेंद्र सिंह शंटी AAP में शामिल हो गए हैं। जितेंद्र सिंह शंटी बीमार लोगों को एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध कराते हैं। लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार कराते हैं। जितेंद्र सिंह शंटी 106 बार रक्तदान करने का रिकॉर्ड भी बना चुके हैं। जितेंद्र सिंह शंटी की राजनीति में यह कोई पहली बार एंट्री नहीं है, वह इससे पहली भारतीय जनता पार्टी के टिकट से दिल्ली विधानसभा की शाहदरा विधानसभा सीट से विधायक रह चुके हैं। अब राम निवास गोयल के इस्तीफे के बाद से जितेंद्र सिंह शंटी को शाहदरा विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी का टिकट मिलना तय लग रहा है।
जितेंद्र सिंह शंटी को एंबुलेंस मैन के नाम से प्रसिद्धि मिली है
जितेंद्र सिंह शंटी को एंबुलेंस मैन के नाम से प्रसिद्धि मिली है। वह शहीद भगत सिंह सेवा दल (SBS) फाउंडेशन के संस्थापक भी हैं। जितेंद्र सिंह शंटी ने वर्ष 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट से शाहदरा विधानसभा सीट में जीत दर्ज की थी। जितेंद्र सिंह शंटी दो बार पार्षद का कार्यभार भी संभाल चुके हैं।
हालांकि, दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 में उन्हें राम निवास गोयल के सामने हार का स्वाद चखना पड़ा था। जितेंद्र सिंह शंटी के AAP में शामिल होने से ठीक पहले राम निवास गोयल का इस्तीफा सामने आया, जिसमे उन्होंने पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल को सूचना दी है कि अब वह चुनावी राजनीति से दूर रहना चाहते हैं।
अरविंद केजरीवाल ने जितेंद्र सिंह शंटी के काम को सराहा
अरविंद केजरीवाल ने जितेंद्र सिंह शंटी को आम आदमी पार्टी की सदस्यता दिलवाने के बाद कहा कि “जितेंद्र सिंह शंटी की पहचान केवल दिल्ली और देश तक सीमित नहीं है बल्कि वह विदेशों में भी काफी चर्चित हैं। वह 30 सालों से समाजसेवा कर रहे हैं। जितेंद्र सिंह शंटी को एंबुलेंस मैन के नाम से जाना जाता है।”
“जितेंद्र सिंह शंटी अभी तक 70 हजार डेड बॉडी का अंतिम संस्कार करा चुके हैं। जितेंद्र सिंह शंटी का कोरोना के समय का काम कोई नहीं भूलता है, उस समय जब मृत लोगों के परिवार उनके शव को नहीं लेते थे, तो जितेंद्र सिंह शंटी ने उन शवों का अंतिम संस्कार कराया। वह खुद भी कोरोना की चपेट में आ गए थे। उस समय उनका पूरा परिवार कोरोना से पीड़ित था, लेकिन वह फिर भी अपने मिशन में लगे रहे। जितेंद्र सिंह शंटी को पद्म श्री से नावाजा गया। वह बीमार लोगों को एंबुलेंस मुहैया करवाते हैं। वह रक्तदान का कैंप भी लगवाते हैं।”




