नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जब भारत पाकिस्तान के खिलाफ जोरदार सैन्य कार्रवाई कर रहा था, तभी 10 मई की शाम को अचानक सीजफायर की घोषणा हुई। इस फैसले ने सबको चौंका दिया। लेकिन अब इस पर से पर्दा उठ चुका है। CDS जनरल अनिल चौहान ने सिंगापुर के शांगरी-ला डायलॉग में बताया कि भारत ने तीन दिन में अपने सारे लक्ष्य हासिल कर लिए थे, इसलिए ऑपरेशन को रोक देना ही बेहतर रणनीति थी।
पहलगाम आतंकी हमले का लिया गया बदला
भारत ने 6-7 मई की रात ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत की। ये कार्रवाई 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में की गई, जिसमें 26 निर्दोष नागरिक मारे गए थे। भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके में नौ बड़े आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया और 100 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया, जिनमें जैश-ए-मोहम्मद के नेता अब्दुल रऊफ अजहर का नाम प्रमुख है।
हवाई अड्डे और रक्षा तंत्र को हुआ भारी नुकसान
भारत के सटीक हमलों में पाकिस्तान के कई प्रमुख हवाई ठिकाने जैसे स्कर्दू, जैकबाबाद, सरगोधा और भोलारी तबाह कर दिए गए। भारतीय वायुसेना ने 10 मई की सुबह ब्रह्मोस मिसाइलों से पाकिस्तान के नूर खान-चकलाला एयरबेस को निशाना बनाया, जो रावलपिंडी में स्थित है। इसमें कई पाकिस्तानी सैनिक मारे गए।
पाकिस्तान ने की सीजफायर की गुहार
जब पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ, तो उसने सीजफायर की अपील की। भारत ने तीन दिन की सैन्य सफलता के बाद यह मांग स्वीकार कर ली। जनरल अनिल चौहान ने कहा, “भारत ने रणनीति के तहत काम किया, और सैन्य कार्रवाई वहीं तक की जहाँ तक जरूरी थी। जनरल चौहान ने कहा कि 1947 में पाकिस्तान कई मामलों में भारत से आगे था, लेकिन आज भारत आर्थिक, सामाजिक और सामरिक रूप से आगे निकल चुका है। उन्होंने बताया कि भारत ने हमेशा शांति की पहल की, यहां तक कि 2014 में पीएम मोदी ने नवाज़ शरीफ को शपथ समारोह में बुलाया, मगर पाकिस्तान ने दुश्मनी ही दिखाई।
भारत ने दी चेतावनी – उकसावे का मिलेगा कड़ा जवाब
CDS अनिल चौहान ने स्पष्ट किया कि सीजफायर का मतलब यह नहीं कि भारत चुप बैठा है। अगर पाकिस्तान फिर से उकसाता है, तो जवाब और भी सख्त होगा। ऑपरेशन सिंदूर ने यह दिखा दिया कि भारत अब आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा। यह ऑपरेशन भारत की सैन्य शक्ति और रणनीतिक परिपक्वता का प्रमाण बनकर सामने आया है। अब देश पूरी तरह से सतर्क है और आतंकवाद के खिलाफ हर मोर्चे पर तैयार है।





